नयी दिल्ली , दिसंबर 12 -- लोक सभा में शुक्रवार को कांग्रेस के के. सुरेश ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में नीतिगत कमियों का मुद्दा उठाया और कहा कि सभी तकनीकी दिक्कतों को दूर करके कर्मचारियों के दावों को निर्धारित समय पर निपटाया जाना चाहिए।

श्री सुरेश ने शून्यकाल में कहा कि ईपीएफओ की कार्यप्रणाली में स्पष्टता का अभाव है और नीतिगत कमियां हैं। ईपीएफओ का यूनीफाइड पोर्टल भी उचित ठंग से काम नहीं करता और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में मददगार साबित नहीं हो रहा है। ईपीएफओ की तकनीकी विफलता के कारण अनेक समस्यायें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के दावों के निपटान में देरी हो रही है, सेवानिवृत्त कर्मियों के पेंशन के मामले में भी स्पष्टता नहीं है, बड़ी संख्या में कर्मचारी पेंशन की मिलने वाली राशि से अवगत नहीं हो पाते। कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े मामले भी बढ़ते ही जा रहे हैं। महंगाई बढ़ रही है, जिससे कर्मचारियों की दिक्कतें बढ़ती जा रही है, उनके साथ अन्याय हो रहा है।

उन्होंने ईपीएफओ की कार्यप्रणाली को तत्काल दुरुस्त करके कर्मचारियों की समस्याओं को दूर करने की मांग की।

आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन के असदुद्दीन ओवैसी ने उर्दू और अरबी भाषा को बढ़ावा दिये जाने की मांग की। उर्दू भारत में जन्मी भाषा है, इसकी तरक्की के भरपूर प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने हैदराबाद की मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय को और बेहतर बनाने भी मांग की। इसी के साथ उन्होंने उर्दू के संबंध में जोश मलिहाबादी का एक शेर भी पढ़ा।

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