पटना , जनवरी 13 -- कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा है कि पारंपरिक लोक कलाओं और लोकगीतों का संरक्षण विभाग की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है, जिसके लिये विशेष ध्यान देने की जरुरत है।
मंत्री श्री प्रसाद मंगलवार को बिहार संग्रहालय में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक सह कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने मार्च- अप्रैल माह में मुंबई में फिल्म निर्माता- निर्देशकों के साथ बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया, जिससे बिहार फिल्म नीति को लेकर हितधारकों से प्रभावी संवाद स्थापित हो सके। उन्होंने संग्रहालयों में संरक्षित कलाकृतियों के मास्टर डाटा के संधारण और नियमित सत्यापन को अनिवार्य बताते हुये कहा कि इससे कलाकृतियों का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित होगा। साथ ही सभी कार्यक्रमों में स्थानीय कला और कलाकारों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
बैठक में कलाकार पंजीयन की जिलावार समीक्षा की गई। भागलपुर, पूर्णिया और गयाजी में पंजीयन की संख्या कम पाये जाने पर संबंधित जिलों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिये गये। विभागीय सचिव प्रणव कुमार ने स्पष्ट किया कि औपचारिक प्रमाण- पत्र के अभाव में भी मान्यता प्राप्त कलाकारों के सत्यापन के आधार पर पंजीयन कराया जा सकता है।
सचिव श्री कुमार ने अटल कला भवन एवं प्रेक्षागृहों के निर्माण कार्यों का नियमित निरीक्षण, समय- सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने और रोहतास, गोपालगंज और वैशाली में भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। कलाकार पेंशन योजना के तहत आयु निर्धारण से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर भी जोर दिया गया।
बैठक के दौरान मंत्री ने विभागीय कैलेंडर का लोकार्पण भी किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित