नयी दिल्ली , मार्च 23 -- लोकसभा में सोमवार को निजी बैंकों द्वारा न्यूनतम बैलेंस के नाम पर वसूली जाने वाली पेनाल्टी का मुद्दा उठा और इसे समाप्त करने की मांग की गयी।
द्रमुक के डाॅ गणपति राजकुमार पी ने शून्यकाल के दैरान कहा कि निजी क्षेत्र के बैंक साधारण लोगों पर बोझ डालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2024-25 में भारतीय बैंकों ने न्यूनतम बैंलेंस नहीं रखने पर 19,886 करोड़ रुपये वसूलने का काम किया है। यह वसूली दैनिक मजदूरों, छोटे किसानों और छात्रों से किया गया है। हालांकि भारतीय स्टेट बैंक ने इस प्रकार की वसूली को 2020 में बंद कर दिया था।
सार्वजनिक क्षेत्र के 12 में से नौ बैंकों ने न्यूनतम बैंलेंस पर लगने वाला जुर्माना हटा दिया है लेकिन निजी क्षेत्र अब भी वसूली कर रहे हैं।
श्री राजकुमार पी ने कहा कि यह पेनाल्टी गरीब, मजदूर और वंचित समाज के लोगों को भुगतान पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को निजी बैंकों द्वारा न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर लगायी जाने वाली पेनाल्टी खत्म करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों से यह व्यवस्था खत्म कर दी गयी है उसके बावजूद निजी बैंक गरीबों से रकम वसूल कर उन्हें परेशान कर रही है।
भारतीय जनता पार्टी के भर्तृहरि महताब ने महान स्वातंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के अवशेषों को जापान से स्वदेश लाने का सरकार से आग्रह किया।
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