अजमेर , जनवरी 07 -- श्वेतांबर जैन परम्परा में तेरा पंथ संप्रदाय के 11वें धर्मगुरुआचार्य महाश्रमण ने कहा है कि लोकतंत्र प्रजा का राज हे, लेकिन इसका कदापि मतलब यह नहीं कि जो मन में आए वहीं करो।
राजस्थान में अजमेर में बुधवार को धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा कि प्रजातंत्र में न्याय पालिका, विधायिका अपना कार्य करती हैं, लेकिन संयम के साथ किए गए निर्णय किसी भी परेशानी को टाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश का युवा धर्म की तरफ आया है, लेकिन उसकी गति बहुत धीमी है।
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि नशे की प्रवृत्ति को त्यागने से उसका उत्थान होगा। जीवन में नियमों का पालन करना आवश्यक है।
इससे पहले नशामुक्ति का संदेश जन जन तक पहुंचाने और राष्ट्रनिर्माण में युवा शक्ति को व्यसनों से दूर रखने का अलख जगा रहे आचार्य महाश्रमण का अजमेर पहुंचने पर सकल जैन समाज की ओर से भव्य स्वागत किया गया। हजारों लोगों के जन सैलाब के साथ आचार्य का मंगल प्रवेश याद्गार बन गया। आचार्य महाश्रमण अब तक करीब 60 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर चुके हैं और उनकी यह यात्रा अब भी जारी है।
उनकी यात्रा विशाल जुलूस के साथ सोनी नसियां के निकट मेरवाड़ा एस्टेट पहुंची जो बड़ी धर्म सभा के रूप में परिवर्तित हो गई। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रावकों ने भक्ति भाव से अपने गुरु के संदेश को आदेश के तौर पर सुना और उस पथ पर चलने की प्रतिज्ञा ली।
इस मौके पर मौजूद प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भी उपस्थित लोगों को संबोधित किया। इस दौरान मंचासीन कई गणमान्य लोगों ने आचार्य के समक्ष अपने विचार प्रतुत किए।
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