बैतूल , जनवरी 05 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के मुलताई ब्लॉक के सुखाखेड़ी गांव में बना चन्नी-मन्नी बांध किसानों के लिए राहत की बजाय बड़ी समस्या बन गया है। करीब 73 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह बांध बीते नौ वर्षों से सिंचाई का मूल उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहा है, जिससे तीन गांवों के सैकड़ों किसान आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सुखाखेड़ी पंचायत के अंतर्गत आने वाले करीब 200 किसान हर वर्ष रबी फसल की बुआई करते हैं। किसानों को उम्मीद रहती है कि बांध का पानी खेतों तक पहुंचेगा, लेकिन दिसंबर आते-आते बांध सूख जाता है और सिंचाई पूरी तरह ठप हो जाती है। किसानों का आरोप है कि निर्माण के समय से ही बांध में लीकेज है, जिसकी आज तक प्रभावी मरम्मत नहीं कराई गई।
किसानों का कहना है कि वे बिजली के अस्थायी कनेक्शन, बीज, खाद और मजदूरी पर हर साल हजारों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन पानी के अभाव में फसल खेतों में ही सूख जाती है। इससे उनकी मेहनत बेकार जा रही है और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। कई किसान मजबूरी में साहूकारों और बैंकों से कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं।
यह बांध वर्ष 2015 में सिंचाई रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया था, ताकि सुखाखेड़ी सहित आसपास के गांवों को नियमित पानी मिल सके, लेकिन तकनीकी खामियों और निर्माण में लापरवाही के कारण यह शुरू से ही रिसाव की समस्या से जूझ रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित