प्रयागराज, फरवरी 4 -- उत्तर प्रदेश के कमला नेहरू अस्पताल में लिवर कैंसर से पीड़ित मात्र दो साल की मासूम माही का ट्रांस-आर्टेरियल कीमोएंबोलाइजेशन (टीएसीई) तकनीक से सफलतापूर्वक उपचार किया गया। यह अस्पताल में इस अत्याधुनिक प्रक्रिया का पहला मामला है।
अस्पताल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने बिना चीरे के इस उपचार को अंजाम दिया। हॉस्पिटल के निदेशक हरिओम सिंह ने बताया कि टीएसीई तकनीक से कीमोथेरेपी दवाओं की उच्च मात्रा को सीधे चयनित धमनी के माध्यम से ट्यूमर तक पहुंचाया। जिससे माही के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।
टीम में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के डॉ. दक्ष चंद्र, मेडिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. मानस दुबे और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सपन श्रीवास्तव शामिल थे। निदेशक ने कहा कि ट्यूमर बोर्ड की सिफारिश पर ही यह तकनीक अपनाई गई। यह सफलता छोटे बच्चों के कैंसर उपचार में नई उम्मीद जगाती है।एक न्यूनतम इनवेसिव (कम चीर-फाड़ वाली) तकनीक है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से लिवर कैंसर (हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) के इलाज के लिए किया जाता है। यह तकनीक कैंसर कोशिकाओं को सीधे कीमोथेरेपी पहुंचाने और ट्यूमर को पोषण देने वाली रक्त आपूर्ति को बंद करने के लिए एंजियाग्राफी का उपयोग करती है। यह प्रक्रिया ट्यूमर को सिकोड़ने या नष्ट करने में मदद करती है।
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