नयी दिल्ली , नवंबर, 16 -- लाल किले के पास सोमवार को हुए कार विस्फोट मामले में जाँच एजेंसियां इस पहलू से भी विश्लेषण कर रही हैं कि क्या वह विस्फोट कथित आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर नबी द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहन जनित परिष्कृत विस्फोटक उपकरण(वीबीआईईडी) से हुआ था। डॉ. उमर उस कार को चला रहा था और उस विस्फोट में तेरह लोग मारे गए थे और चौबीस घायल हुए थे।
उस विस्फोट में डॉ. उमर भी मारा गया था और स्टीयरिंग व्हील तथा इंजन के बीच एक पैर के टुकडे तथा उसकी मां के डीएनए नमूने से जांच की गयी थी। इस जांच में दोनों डीएनए नमूने आपस में मेल खा रहे थे।
जांच एजेंसी सूत्रों ने यूनीवार्ता को बताया कि वे इस बात की जाँच कर रहे हैं कि जिस आई- 20 कार को डॉ. उमर नबी चला रहा था वह वीबीआईईडी हो सकती है क्योंकि वह पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इस कार को लेकर घूम रहा था और उसमें बम होने का पता ही नहीं चला।
एक सूत्र ने बताया कि एक वीबीआईईडी कार कुछ सुरक्षा परतों को पार कर सकती है जो आमतौर पर पैदल यात्री नहीं कर पाते हैं। यह कई सीमाओं को पार करते हुए लाल किले जैसे खतरनाक लक्ष्य के बहुत करीब पहुँच सकती है।
सूत्रों ने बताया "एक वीबीआईईडी विनाश के संदर्भ और पैमाने को तुरंत बदल देता है। यह सिर्फ़ एक बम नहीं है; यह एक विशिष्ट प्रकार की हथियार प्रणाली है जिसके बहुत ही घातक परिणाम हो सकते हैं। वीबीआईईडी एक गतिशील, बड़े आकार का बम होता है जिसे किसी खास बड़े लक्ष्य के करीब एक भारी विस्फोटक सामग्री (पेलोड) पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 'वाहन' का डिजाइन और प्रकार इसके विनाशकारी प्रभाव और बढ़ा देता है। "सूत्रों के अनुसार लाल किले में हुए विस्फोट का प्रभाव इतना ज़ोरदार था कि इसकी आवाज़ आईटीओ तक सुनी गयी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसने धरती को 40 फीट की गहराई तक हिला दिया। एक वीबीआईईडी सैकड़ों या हज़ारों पाउंड विस्फोटक ले जा सकता है जिससे ऐसा विस्फोट हो सकता है।
सूत्र ने कहा, "यह मज़बूत इमारतों को ध्वस्त कर सकता है, वाहनों को पलट सकता है, और एक बड़े क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे को विनाशकारी नुकसान पहुँचा सकता है और दिल्ली विस्फोट में भी यही हुआ। अपराधी अक्सर हताहतों की संख्या बढ़ाने के लिए वाहन में गैस सिलेंडर के साथ साथ जैसे अतिरिक्त नुकीली वस्तुएं भी भर देते हैं ताकि लोगों को गंभीर चोंटें आएं।
सूत्र ने बताया कि घटनास्थल पर कोई डेटोनेटर नहीं मिला, जिसकी उन्हें तलाश थी। इससे यह भी संकेत मिलता है कि यह एक वीबीआईईडी था। लाल किले के बाहर विस्फोट के तुरंत बाद भीषण आग लग गई जो वीबीआईईडी हमले में आम बात है।
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