अलवर , अप्रैल 18 -- बदलते दौर में समाज की सोच भी बदल रही है, और अब बेटियों को भी बेटों के समान सम्मान देने की परंपरा मजबूत होती दिख रही है।

इसी सकारात्मक बदलाव की मिसाल राजस्थान में खैरथल तिजारा जिले के किशनगढ़बास नगरपालिका क्षेत्रके गुर्जर वाटी मोहल्ले में देखने को मिली, जहां गुर्जर समाज के एक परिवार ने अपनी दो बेटियों को घोड़ी पर बिठाकर बिंदोरी निकालकर अनूठा संदेश दिया। दोनों बिटिया की शादी 19 अप्रैल को है।

गुर्जर वाटी निवासी शिवहरी गुर्जर के परिवार ने वर्षों से चली आ रही रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए अपनी बेटियों वर्षा और दीक्षा की शादी से पहले सभी रस्में उसी प्रकार निभाईं, जैसे आमतौर पर बेटों के लिए निभाई जाती हैं। रविवार को होने वाली शादी से पहले दोनों बेटियों को सजे-धजे घोड़ी पर बिठाया गया और गाजे-बाजे के साथ पूरे मोहल्ले में बिंदोरी निकाली गयी। इस दौरान माहौल पूरी तरह उत्सवमय नजर आया।

बिंदोरी में शामिल महिलाएं, पुरुष, बच्चे और रिश्तेदार ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर झूमे। वर्षा और दीक्षा की सहेलियों एवं परिवारजनों ने नाच-गाकर खुशी का इजहार किया। पूरे आयोजन ने न केवल एक पारिवारिक खुशी का रूप लिया, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी दिया कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं।

दुल्हन के पिता शिवहरी गुर्जर ने बताया कि समय के साथ समाज में बेटियों के प्रति सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब लोग बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि गर्व मानने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल रस्म निभाना नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश देना है कि बेटा और बेटी दोनों समान हैं।

इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। पूर्व विधायक रामहेत यादव, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता राजेश बटवाडा, हेमेंद्र चौधरी, बनेसिंह नरुका, लीलू पंडित और जेपी गुर्जर और अन्य लोगों नेइस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों की बिंदोरी निकालना एक प्रतीकात्मक कदम है, जो समाज में व्याप्त भेदभाव को खत्म करने की दिशा में प्रेरणा देता है।

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