जगदलपुर , नवंबर 06 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर की धरती पर महिलाएँ आज आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा लिख रही हैं। 'लखपति दीदी योजना' के अंतर्गत स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएँ अपनी मेहनत, संकल्प और हुनर से न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।

तोकापाल विकासखंड के भडिसगाँव की उजाला स्व सहायता समूह की सदस्य कलाबत्ती पोयाम और मंगतीन पहले सीमित आय में परिवार चलाने को मजबूर थीं। बिहान योजना के अंतर्गत मिले सामुदायिक निवेश कोष और बैंक लिंकेज से उन्होंने बतख और बकरी पालन को अपनाया। अब वे सालाना लाखों की आमदनी अर्जित कर रही हैं और अपने गाँव की अन्य महिलाओं के लिए उदाहरण बन चुकी हैं।

इसी तरह मटकोट निवासी कमली कश्यप और प्रमिला ठाकुर ने खेती, किराना दुकान और मुर्गी पालन के जरिए स्थायी आमदनी का स्रोत बनाया है। कमली ने मक्का की खेती से 45 हजार रुपये का मुनाफा कमाकर उसे कारोबार में लगाया। वहीं प्रमिला ठाकुर ने कृषि और बतख पालन से परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की।

ग्राम परचनपाल की शोभा बघेल ने सीसल जूट सामग्री निर्माण का काम शुरू कर न केवल खुद आत्मनिर्भरता हासिल की, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी रोज़गार उपलब्ध कराया। उनके बनाए उत्पाद अब स्थानीय बाजारों में लोकप्रिय हो रहे हैं।

इन महिलाओं की कहानी यह साबित करती है कि अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएँ भी आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बन सकती हैं। 'लखपति दीदी योजना' ने न केवल उनकी आमदनी बढ़ाई है बल्कि आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को भी नई ऊँचाई दी है।

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