नयी दिल्ली , मार्च 13 -- क्लासरूम से लेकर थ्रोइंग सर्कल तक, एक टीचर लक्ष्मी ने एक यादगार पल रचा, जब उन्होंने वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में महिलाओं के शॉट पुट ऍफ़36/ऍफ़37/ऍफ़40 इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय सालों की कड़ी मेहनत और लगातार ट्रेनिंग को दिया।

जीत के बाद 'यूनीवार्ता' से बात करते हुए लक्ष्मी ने कहा कि यह मेडल लंबे समय के समर्पण और रोज़ाना के अभ्यास का नतीजा है। उन्होंने कहा, "मैं अब बहुत खुश हूँ कि मैं शॉट पुट में गोल्ड मेडलिस्ट बन गई हूँ। मैं और मेडल जीतने के लिए कड़ी मेहनत और अभ्यास करती रहूँगी।"लक्ष्मी ने 7.76 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि भारत की अकुताई सीताराम उल्भगत 5.49 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। भूटान की चिमी डेमा ने 5.27 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता।

एथलेटिक्स में अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए लक्ष्मी ने कहा कि यह प्रगति सालों से लगातार प्रयासों और प्रदर्शन में सुधार के ज़रिए धीरे-धीरे हुई है। उन्होंने कहा, "अभ्यास में हमेशा चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन हर साल सुधार होता है। पहले मेरे थ्रो लगभग छह मीटर के होते थे, और अब मैंने सात मीटर का आँकड़ा पार कर लिया है। इससे मुझे बहुत खुशी होती है।"इस पैरा-एथलीट ने आगे कहा कि अनुशासित ट्रेनिंग ही उनके बेहतरीन प्रदर्शन के पीछे का मुख्य कारण रही है। उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ़ अभ्यास पर ध्यान देती हूँ। मैं हर दिन सुबह और शाम, दोनों समय ट्रेनिंग करती हूँ। मेरा पूरा ध्यान एथलेटिक्स और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर ही रहता है।"लक्ष्मी ने कहा कि यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि यह इस खेल के प्रति सालों के समर्पण के बाद मिली है, और इसने उन्हें आगे बड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए और भी ज़्यादा प्रेरित किया है।

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