हैदराबाद , दिसंबर 08 -- तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोमवार को भारत फ्यूचर सिटी में आयोजित तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट में राज्य के भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश करते हुए कहा कि तेलंगाना भारत का सबसे उन्नत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी राज्य बनने की राह पर है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत 1947 में भारत के भाग्य की उस ऐतिहासिक रात का स्मरण करते हुए की, जब देश के संविधान निर्माताओं ने संप्रभुता, लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित संविधान तैयार किया था। उन्होंने कहा कि वही विचार-विमर्श, बहस और राष्ट्र-निर्माण की भावना आज तेलंगाना को अपने दीर्घकालिक विकास पथ पर ले जा रही है।
श्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना को महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर से प्रेरणा मिलती है। भारत का सबसे नया राज्य होने के बावजूद तेलंगाना अब देश का सबसे विकसित राज्य और विश्व के सर्वश्रेष्ठ राज्यों में शामिल होने के लिए कृतसंकल्प है।
तेलंगाना राइजिंग 2047 विजन की उत्पत्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि "यह विजन सिर्फ हमारा नहीं, यह तेलंगाना की जनता का सामूहिक सपना है।"उन्होंने बताया कि वर्तमान में तेलंगाना की जनसंख्या भारत की केवल 2.9 प्रतिशत है, लेकिन यह राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 5 प्रतिशत का योगदान देता है। "2047 तक मैं चाहता हूं कि तेलंगाना भारत के जीडीपी में 10 प्रतिशत का योगदान दे।"मुख्यमंत्री ने कहा कि तेलंगाना का लक्ष्य 2034 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना और 2047 तक 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना हैं।
विकास रणनीति बताते हुए श्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना भारत का पहला ऐसा राज्य बनेगा जो तीन अलग-अलग आर्थिक क्षेत्रों में बंटा होगा जिसे सर्विसेज, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि मॉडल कहा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना चीन, जापान, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर से सीख लेकर वैसी ही तेज गति से विकास करना चाहता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित