नयी दिल्ली , दिसंबर 02 -- रेलवे ने नवंबर माह में 13.57 करोड़ टन माल ढुलाइ्यीरकिया है, जो पिछले वर्ष इसी महीने के 13.02 करोड़ टन से 4.2 प्रतिशत अधिक है।
रेल मंत्रालय की तरफ से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से प्रमुख वस्तु खंडों के परिवहन में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण हुयी है। इसके अंतर्गत पिग आयरन और तैयार स्टील (16 प्रतिशत), लौह अयस्क (9.7 प्रतिशत), उर्वरक (10.6 प्रतिशत), कंटेनर (6.8 प्रतिशत), और शेष अन्य सामान (23.6 प्रतिशत) की ढुलाई शामिल हैं।
ज्ञात रहे कि नवंबर 2025 तक संचयी आधार पर माल ढुलाई 3.3 प्रतिशत बढ़कर 107.08 करोड़ टन हो गई है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 के केवल आठ महीनों में 2013-14 के पूरे वर्ष की तुलना में अधिक माल ढुलाई की है। उस वर्ष कुल ढुलाई 1,05.5 करोड़ टन थी।
देश की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक मार्ग में से एक भारतीय रेलवे, अभूतपूर्व पैमाने पर माल और लोगों को ले जाकर, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करके और उद्योगों को तेज़ी से और अधिक टिकाऊ रूप से विकसित करने में सक्षम बनाकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके साथ ही रेलवे प्रतिदिन दो करोड़ से अधिक यात्रियों को ले जाकर बड़ी और बढ़ती आबादी की गतिशीलता आवश्यकताओं को पूरा कर रही है। इससे भारत के परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ मजबूत हो रही है।
यह निरंतर वृद्धि औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत कर रही है। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार दोनों को सहारा दे रही है, और एक अधिक टिकाऊ, लागत-कुशल लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान कर रही है। रेल परिवहन की लागत सड़क परिवहन की तुलना में लगभग आधी होने के कारण, इस लागत लाभ का प्रभाव और भी बढ़ जाता है। इससे व्यवसायों के लिए पर्याप्त बचत होती है और व्यापक आर्थिक लाभ होता है।
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