नयी दिल्ली , मार्च 18 -- भारतीय रेल ने अपने आधारभूत ढांचे को बढ़ावा देने के लिए पिछले 11 वर्ष में स्वचालित मार्ग से 9420 लाख डॉलर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हासिल किया है।

यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गरुवार को एक सवाल के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से एफडीआई नीति को लेकर 15 अक्टूबर 2020 को जारी अधिसूचना के अनुसार रेलवे आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। इसमें समय-समय पर संशोधन भी किए गये हैं।

इस नीति के तहत निजी-सार्वजनिक साझेदारी (पीपीपी) के माध्यम से उपनगरीय गलियारा परियोजनाओं, हाई स्पीड ट्रेन परियोजनाओं, समर्पित माल ढुलाई लाइनओं, ट्रेनसेट और लोकोमोटिव/कोच विनिर्माण और रखरखाव सुविधाओं सहित रोलिंग स्टॉक और रेलवे विद्युतीकरण को रखा गया है। इसके साथ ही, इसमें सिग्नलिंग प्रणालियां, माल ढुलाई टर्मिनलों, यात्री टर्मिनलों, रेलवे लाइन/साइडिंग से संबंधित औद्योगिक भाग में आधारभूत ढांचे जिसमें विद्युतीकृत रेलवे लाइनें और मुख्य रेलवे लाइन से संपर्क शामिल है। इसके अलावा इसमें मास रैपिड परिवहन प्रणाली को भी रखा गया है।

उन्होंने बताया कि इस दौरान हाई-स्पीड रेल, माल और यात्री परिचालन और तकनीकी सहयोग से उन्नत सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) समाधान के लिए स्विट्जरलैंड, जर्मनी, रूस और स्पेन के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गये। वहीं, लोकोमोटिव, कोच, वैगन, मेट्रो कार और ज़रूरी कलपुर्जों के घरेलू विनिर्माण के समर्थन से भारतीय रेलवे का निर्यात पिछले नौ वर्ष में 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

उन्होंने बताया कि भारतीय रेल के रोलिंग स्टॉक्स अमेरिका , ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, स्पेन, इटली, मोज़ाम्बिक, मैक्सिको, बांग्लादेश, श्रीलंका और रोमानिया जैसे विकसित और विकासशील देशों को निर्यात किये गये हैं।

श्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे में 2013-14 में पूंजी निवेश के लिए सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) 29,055 करोड़ रुपये था। नेटवर्क बढ़ाने, रोलिंग स्टॉक बढ़ाने, सुरक्षा में सुधार, यात्री सुविधाओं, सड़क सुरक्षा के कार्यों और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए प्रचुर सहायता देने के लिए, केन्द्र सरकार ने हर वर्ष सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) को लगातार बढ़ाया है और 2026-27 के लिए 2.78 लाख करोड़ रुपये दिए गये हैं। प्रचुर घरेलू वित्त पोषण ने भारतीय रेल क्षेत्र को वैश्विक बाज़ार के साथ स्पर्धा करने के लिए अवसंरचना और प्रौद्योगिकी में ज्यादा निवेश करने में सहायता की है।

उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्ष में, भारत ने मज़बूत और विविधीकृत रेल विनिर्माण पारिस्थितिकी विकसित की है, जिसमें भारतीय रेल की उत्पादन इकाइयां और औद्योगिक आधार भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि यह उद्योग भारत में रेलवे रोलिंग स्टॉक्स की लगभग पूरी रेंज जैसे लोकोमोटिव, यात्री कोच, वैगन, और आवश्यक पुर्ज़े जैसे कि ट्रैक्शन मोटर, गियरबॉक्स, मोटराइज्ड बोगी, ट्रैक्शन ट्रांसफ़ॉर्मर, मेट्रो कार, प्रोपल्शन सिस्टम, ट्रैक्शन और सहायक कनवर्टर, केबल हार्नेस, इलेक्ट्रॉनिक कार्ड और मैग्नेटिक्स इत्यादि बनाता है। ये सभी सामान ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, मोज़ाम्बिक, मैक्सिको, बंगलादेश , श्रीलंका, रोमानिया, स्पेन और इटली जैसे विकसित और विकासशील देशों में निर्यात किये जाते हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित