लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर , जनवरी 07 -- उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (उप्र रेरा) के लिए वर्ष 2025 उपलब्धियों से भरा रहा। परियोजना पंजीकरण, आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयों की स्वीकृति और पूंजी निवेश तीनों मोर्चों पर रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गयी। आंकड़े इस बात के साक्ष्य हैं कि पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी नियमन के चलते रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों और खरीदारों का भरोसा मजबूत हुआ है।
उप्र रेरा के अंतर्गत वर्ष 2025 में कुल 308 रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण किया गया, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या 259 थी। इस तरह 49 परियोजनाओं (लगभग 19 प्रतिशत) की वृद्धि दर्ज हुई। यह बढ़ोतरी डेवलपर्स और निवेशकों के बीच प्रदेश की नियामक व्यवस्था पर बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
वर्ष 2024 में पंजीकृत परियोजनाओं के अंतर्गत 69,365 यूनिट प्रस्तावित थीं, जो 2025 में बढ़कर 84,976 यूनिट हो गईं। यानी 15,611 यूनिट (22.5 प्रतिशत) की वृद्धि हुई। स्वीकृत यूनिटों में से 62,672 आवासीय यूनिट (फ्लैट, प्लॉट और विला) तथा 22,304 व्यावसायिक यूनिट (दुकानें, स्टूडियो व अन्य व्यावसायिक परिसंपत्तियां) शामिल हैं।
बीते दो वर्षों में कुल मिलाकर 1.54 लाख से अधिक आवासीय और व्यावसायिक यूनिट स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिससे खरीदारों और निवेशकों के लिए कई विकल्प उपलब्ध हुए हैं। उप्र रेरा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक पूंजी निवेश में भारी बढ़ोतरी रही। वर्ष 2024 में पंजीकृत परियोजनाओं के तहत कुल अनुमानित निवेश 44,526 करोड़ रुपये था, जो 2025 में बढ़कर 68,328 करोड़ रुपये हो गया। इस प्रकार 23,802 करोड़ रुपये की वृद्धि के साथ निवेश में 53.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
उप्र रेरा के तहत लागू डिजिटाइज्ड और समयबद्ध प्रक्रियाओं, पारदर्शी नियमों और उपयोगकर्ता-अनुकूल आईटी आधारित पोर्टल ने परियोजना पंजीकरण और शिकायत निस्तारण को सरल बनाया है। 30 दिनों के भीतर निस्तारण की व्यवस्था ने खरीदारों का विश्वास और मजबूत किया है।
कुल मिलाकर, परियोजना पंजीकरण, यूनिट स्वीकृति और निवेश में हुई यह वृद्धि दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर संतुलित विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है और प्रदेश निवेश के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बनकर उभर रहा है।
वर्ष 2024 में परियोजना पंजीकरण जहां 23 जिलों तक सीमित था, वहीं 2025 में यह दायरा बढ़कर 27 जिलों तक पहुंच गया। इससे छोटे और उभरते शहरों में निवेशकों की रुचि स्पष्ट हुई है।
बुलंदशहर (3), रामपुर (2), चंदौली (3), उन्नाव (3), गोंडा (3) सहित मऊ और मिर्जापुर में भी पहली बार परियोजनाओं को स्वीकृति मिली। इन जिलों में कुल मिलाकर 1,027 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।
उप्र रेरा ने प्रदेश को पश्चिम, मध्य और पूर्व-तीन क्षेत्रों में विभाजित कर प्रभावी नियमन और निगरानी की।पश्चिमी क्षेत्र में वर्ष 2025 के दौरान 175 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें 55,620.43 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके तहत 60,214 आवासीय और व्यावसायिक यूनिटों के निर्माण की योजना है।
इस क्षेत्र में नोएडा, गाजियाबाद और आगरा निवेश के लिहाज से शीर्ष पर रहे, जबकि अलीगढ़, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, हापुड़, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर में भी परियोजनाएं पंजीकृत हुईं।
मध्य क्षेत्र में 104 परियोजनाओं के तहत 11,270.42 करोड़ रुपये का निवेश स्वीकृत किया गया, जिससे 21,646 यूनिटों का निर्माण प्रस्तावित है। इस क्षेत्र में लखनऊ निवेश का प्रमुख केंद्र रहा, जबकि कानपुर नगर, बाराबंकी, बरेली, मथुरा, शाहजहांपुर और उन्नाव में भी विकास कार्य आगे बढ़ा।
पूर्वी क्षेत्र में उप्र रेरा के तहत 29 परियोजनाओं को 1,436.86 करोड़ रुपये के निवेश के साथ मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं से 3,116 यूनिटों का निर्माण प्रस्तावित है।
इस क्षेत्र में प्रयागराज निवेश के मामले में सबसे आगे रहा, जबकि चंदौली, गोंडा, मऊ, मिर्जापुर और वाराणसी जैसे शहरों में भी परियोजनाएं पंजीकृत हुईं।
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