चेन्नई , अप्रैल 02 -- तमिलनाडु में विल्लुपुरम जिले की एक स्थानीय अदालत ने गुरुवार को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और सत्तारूढ़ द्रमुक के कद्दावर नेता के. पोनमुडी, उनके बेटे गौतम सिगमणि और पांच अन्य लोगों को 28.36 करोड़ रुपये के अवैध लाल रेत खनन मामले में बरी कर दिया।

विल्लुपुरम के प्रधान जिला न्यायाधीश ए. मणिमोझी ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए सबूतों के अभाव में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया।

श्री पोनमुडी और उनके बेटे के अलावा, बरी किए गए पांच अन्य लोग जयचंद्रन, राजा महेंद्रन, सदानंदम, कोधाकुमार और गोपीनाथन हैं। इस मामले में कुल आठ लोगों पर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, उनमें से एक लोगनाथन की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई।

श्री पोनमुडी ने अपने गृह जिले विल्लुपुरम से लगातार विधानसभा चुनाव जीता लेकिन इस बार चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और उनकी जगह द्रमुक ने उनके बेटे और पूर्व लोकसभा सदस्य गौतम सिगमणि को 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में तिरुकोविलूर सीट से उम्मीदवार बनाया है। वर्तमान में यह सीट श्री पोनमुडी के पास है।

अभियोजन पक्ष का मामला यह था कि श्री पोनमुडी ने 2006-11 के द्रमुक शासनकाल के दौरान खान एवं खनिज मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में जिले के पूथुरई खदान में निर्धारित सीमा से अधिक लाल रेत का अवैध खनन किया था।

वनूर ब्लॉक के पूथुरई गांव में स्थित लाल रेत की खदान श्री पोनमुडी द्वारा उनके बेटे गौतम सिगमणि और पांच अन्य लोगों को आवंटित की गई थी। अभियोजन पक्ष ने आईपीसी के तहत आपराधिक धमकी, साजिश एवं धोखाधड़ी के आरोपों के अलावा तमिलनाडु लघु खनिज रियायत अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला दिया।

जिला अपराध शाखा (डीसीबी) ने आरोप लगाया कि पट्टेदारों ने लघु खनिजों से संबंधित नियमों का घोर उल्लंघन किया। सितंबर 2012 में खदान का सर्वेक्षण करने के बाद, तत्कालीन वनूर तहसीलदार ने डीसीबी में शिकायत दर्ज कराई कि पट्टेदारों ने कथित रूप से अनुमत सीमा से ज्यादा खुदाई की, जिससे अवैध रूप से 2,46,646 यूनिट लाल रेत का खनन किया गया और राज्य के खजाने को 28.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

आरोप पत्र दाखिल किया गया और अभियोजन पक्ष ने 57 गवाहों की सूची तैयार की जिनमें से 33 मुकर गए। अभियोजन पक्ष के गवाहों की पूछताछ पिछले साल अक्टूबर में पूरी हुई।

दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद, न्यायाधीश ने मामले में अपना फैसला दो अप्रैल तक के लिए सुरक्षित रख लिया और डीसीबी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी आरोपी अदालत में उपस्थित हों। आज जब सभी सातों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया गया तब सभी आरोपी अदालत में मौजूद थे।

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