मास्को , दिसंबर 03 -- रूस ने ब्रुसेल्स में अवरुद्ध अपनी संप्रभु निधियों के संभावित उपयोग पर यूरोपीय नेताओं की टिप्पणियों की आलोचना की है और यूरोप पर युद्धोन्माद एवं चोरी का आरोप लगाया है। रूस ने कहा कि यूरोप मास्को की वित्तीय संपत्तियों को चुराकर उन्हें यूक्रेन को ऋण देने की योजना बना रहा है ताकि कीव अपनी "युद्ध मशीन" को वित्तपोषित कर सके।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने संवाददाताओं से कहा, "वे (यूरोपीय) यूरोप में अवरुद्ध रूसी परिसंपत्तियों को चुराने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। यह 200 अरब डॉलर से अधिक है।"उन्होंने ब्रुसेल्स पर मास्को और कीव के बीच किसी भी प्रकार के व्यवहार्य एवं पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समझौते पर पहुंचने के प्रति गंभीर नहीं होने का भी आरोप लगाया तथा कहा कि रूस के साथ सभी प्रकार के संचार को लगभग पूरी तरह से बंद कर देने से समस्या और बढ़ रही है।

रूसी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, "हम यूरोपीय लोगों से बात नहीं कर रहे हैं। हमारे बीच कोई संवाद नहीं है, एक शब्द भी नहीं। इसलिए अगर आप एक-दूसरे से बात नहीं करते हैं तो आप इतनी जटिल समस्या पर अपने सहयोगियों की स्थिति कैसे जान सकते हैं? यह हमारी सबसे बड़ी समस्या है।"श्री पेस्कोव ने यूरोप पर लगातार यूक्रेन को शत्रुता जारी रखने के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मास्को, हालांकि वार्ता के लिए पूरी तरह से तैयार है, लेकिन वह कीव के साथ तभी बातचीत करेगा है जब वह अपने विशेष अभियान के मुख्य उद्देश्यों को प्राप्त कर ले और किसी भी चर्चा में इन विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "हम शांति चाहते हैं। हम तत्काल शांति समझौता क्यों नहीं कर लेते? यह बहुत कठिन है।" उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति पुतिन को युद्ध शुरू करने के लिए प्रेरित करने वाले मूल कारण थे और इसलिए किसी भी प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य इन मूल कारणों को समाप्त करना होना चाहिए।

उन्होंने अमेरिका की प्रभावी मध्यस्थता की प्रशंसा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की प्रस्तावित पहल ने यूक्रेन पर स्थायी समझौते तक पहुंचने के लिए एक अच्छा आधार प्रदान किया है जो श्री पुतिन की आज अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ होने वाली बैठक से पहले संभव हुआ है।

श्री पेस्कोव ने आर्थिक मोर्चे पर कहा कि रूस अभी भी विदेशी निवेश के लिए खुला है तथा भारी प्रतिबंधों के बावजूद विभिन्न देशों के उद्धोग इसमें रुचि दिखा रहे हैं।

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