मॉस्को/वॉशिंगटन , मार्च 07 -- रूस-अमेरिका के बीच इस वक्त रूसी ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने को लेकर बातचीत चल रही है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन रूसी तेल की आपूर्ति पर लगी पाबंदियों को और कम करने पर विचार कर सकता है। उन्होंने इसके पीछे मुख्य वजह ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन में आयी बड़ी बाधाओं को बताया।

फॉक्स बिजनेस को श्री बेसेंट ने बताया, "हम रूसी तेल पर लगे कुछ और प्रतिबंध हटा सकते हैं।"उन्होंने कहा कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय समुद्र में मौजूद 'सैकड़ों मिलियन बैरल' प्रतिबंधित तेल बाजार में लाने के लिए कदम उठाने पर विचार कर रहा है, ताकि वैश्विक बाजार को कुछ राहत मिल सके।

श्री बेसेंट के इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए रूसी निवेश एवं आर्थिक सहयोग के लिए राष्ट्रपति के विशेष दूत और 'रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड' (आरडीआईएफ) के सीईओ किरिल दिमित्रीव ने पुष्टि की कि दोनों देश इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह साबित हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा, "जिन देशों ने ऊर्जा के क्षेत्र में रूस से साझेदारी की है, उन्होंने समझदारी भरा रणनीतिक फैसला लिया है। वे इस ऊर्जा संकट से बेहतर तरीके से निपट पायेंगे और भविष्य के लिए मजबूत स्थिति में होंगे।"रूसी दूत की यह टिप्पणी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस हफ्ते की शुरुआत में की गयी उस भविष्यवाणी के बाद आयी है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि ईरान संघर्ष के कारण पैदा हुई बाधाओं की वजह से वॉशिंगटन को अंततः रूसी ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

श्री पुतिन ने यह भी कहा कि इस संकट से रूस के लिए अपने ऊर्जा निर्यात बढ़ाने के अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मॉस्को अपने तेल और गैस की खेप को वैकल्पिक बाजारों की ओर मोड़ सकता है, क्योंकि खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं।

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