रूपनगर , जनवरी 19 -- पंजाब में रूपनगर पुलिस ने एक गिरोह का पर्दाफाश किया जो बोगस/फर्जी वेबसाइट/सिस्टम के ज़रिए नकली "क्यू फार्म" बनाकर आपूर्ति कर रहा था। इन नकली फार्म का इस्तेमाल रेत, बजरी वगैरह जैसे निर्माण सामग्री को गैर-कानूनी तरीके से परिवहन करने के लिए किया जा रहा था, जिससे पंजाब सरकार को भारी नुकसान हो रहा था।

रूपनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनिंदर सिंह ने सोमवार को बताया कि इस मामले में अरुण कुमार उर्फ राणा, निवासी गांव नैनवा, थाना गढ़शंकर, जिला होशियारपुर, हरिंदरपाल भल्ला उर्फ नोनू (नोनू भल्ला) निवासी गांव भरतगढ़, जिला रूपनगर, गुरमीत सिंह, निवासी सरसा नंगल, जिला रूपनगर और अखिलेश प्रताप शाही, निवासी विवेक पुरम, तारामंडल, सिद्धार्थ एन्क्लेव, एसओ गोरखपुर, उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ थाना नंगल में बीएनएस की धाराओं और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गयी है।

श्री सिंह ने बताया कि डीएसपी (डिटेक्टिव) जतिंदर चौहान और डीएसपी नंगल हरकीरत सिंह के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें बनायी गयीं। यह ऑपरेशन स्पेशल ब्रांच टीम इंचार्ज इंस्पेक्टर गुरविंदर सिंह ढिल्लों, सीआईए स्टाफ इंचार्ज इंस्पेक्टर मंदीप सिंह, पुलिस स्टेशन नंगल के एसएचओ निरीक्षक सिमरनजीत सिंह और नया नंगल इंचार्ज सरताज सिंह के सहयोग से मिलकर किया गया।

श्री सिंह ने बताया कि जांच के मुताबिक, आरोपियों ने एक गिरोह बनाया और पंजाब सरकार के माइंस एंड जियोलॉजी पोर्टल जैसी दिखने वाली एक नकली वेबसाइट बनाई ताकि ट्रांसपोर्टर्स और एनफोर्समेंट एजेंसियों को गुमराह किया जा सके। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि गुरमीत सिंह पिछले दो साल से अखिलेश प्रताप शाही के सम्पर्क में था और तब से वह इस नकली पोर्टल/वेबसाइट को तैयार और टेस्ट कर रहा था। यह गैर-कानूनी रैकेट पिछले 5-6 महीनों से सक्रिय रूप से काम कर रहा था। इस फर्जी पोर्टल के ज़रिए आरोपी अलग-अलग ट्रक नंबरों के लिए नकली क्यू फॉर्म तैयार कर रहे थे और उन्हें ट्रक ड्राइवरों/ट्रांसपोर्टरों को सप्लाई कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक यह पता चला है कि आरोपियों ने करीब 450-500 नकली फॉर्म तैयार किये हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से नौ मोबाइल फ़ोन और दो लैपटॉप भी बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच चल रही है जिसके तहत नकली फॉर्म का इस्तेमाल करने वालों की पहचान की जा रही है। इसमें शामिल ट्रकों की पूरी लिस्ट और उनकी मूवमेंट डिटेल्स का सत्यापन किया जा रहा है। वेबसाइट ट्रेल, होस्टिंग डिटेल्स, लॉगिन और पेमेंट वगैरह के बारे में पूरे डिजिटल सबूत तलाशे जा रहे हैं। इस रैकेट से जुड़े पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।

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