नयी दिल्ली , जनवरी 25 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश के विकास में नारी शक्ति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए रविवार को कहा कि आज देश की बहन-बेटियां रूढ़ियों को तोड़कर देश के विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में श्रीमती मुर्मु ने कहा, ''महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारी बहनें और बेटियां, परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। महिलाएं देश के समग्र विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं।''उन्होंने कहा, "विकसित भारत के निर्माण में नारी-शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। उनके बढ़ते हुए योगदान से हमारा देश महिला-पुरुष समानता पर आधारित समावेशी गणतंत्र का उदाहरण प्रस्तुत करेगा।"राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए किये जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान से बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है। 'प्रधानमंत्री - जन धन योजना' के तहत अब तक 57 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें लगभग 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी दस करोड़ से अधिक बहनें विकास की नयी परिभाषा लिख रही हैं।

खेत-खलिहानों से लेकर अन्तरिक्ष तक, स्व-रोजगार से लेकर सेनाओं तक महिलाओं की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, "खेल-कूद के क्षेत्र में हमारी बेटियों ने विश्व-स्तर पर नये प्रतिमान स्थापित किये हैं।"उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष नवंबर में देश की बेटियों ने आईसीसी महिला विश्व कप और उसके बाद दृष्टिबाधित महिलाओं का टी20 विश्व कप जीतकर स्वर्णिम इतिहास रचा है। पिछले ही वर्ष शतरंज विश्व कप का फाइनल मैच भारत की ही दो बेटियों के बीच खेला गया। यह खेल-जगत में देश की बेटियों के वर्चस्व का प्रमाण हैं।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है। महिलाओं के राजनैतिक सशक्तिकरण को नयी ऊंचाई देने वाले 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' से महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी।

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