नयी दिल्ली , नवंबर 21 -- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहीन कांत पांडेय ने रियल एस्टेट निवेश ट्रस्टों (रिट्स) और बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्टों (इनविट्स) में खुदरा निवेश बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए शुक्रवार को कहा कि ये दोनों तंत्र देश की बुनियादी ढांचा जरूरतों के लिए पैसे जुटाने का अनोखा अवसर प्रदान करते हैं।

भारत इनविट्स एसोसिएशन और इंडियन रिट्स एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री पांडेय ने बताया कि सेबी दोनों इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश बढ़ाने के उपाय कर रहा है। इसके लिए वह केंद्रीय वित्त मंत्रालय और राज्य सरकारों के साथ भी चर्चा कर रहा है। उन्होंने एमएससीआई की तरह दूसरे सूचकांकों में इन्हें अधिक से अधिक शामिल करने की जरूरत पर बल दिया।

कार्यक्रम में नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने कहा कि सरकार को परिसंपत्ति प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाने की बजाय इनविट्स बनाकर उसके मौद्रीकरण को सरल बनाने पर विचार करना चाहिये। उन्होंने कहा कि भारत के पास रिट्स और इनविट्स मिलाकर एक लाख करोड़ डॉलर यानी लगभग 90 लाख करोड़ रुपये के निवेश तक पहुंचने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में देश में पांच सूचीबद्ध रिट्स और 24 सूचीबद्ध इनविट्स हैं। इनके पास सम्मिलित रूप से 9.25 लाख करोड़ रुपये का निवेश है। इसमें सात लाख करोड़ रुपये का निवेश इनविट्स के पास है।

श्री पांडेय ने कहा कि आने वाले समय में देश में सड़क, परिवहन, शहरीकरण, ऊर्जा और विमानन क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। वैश्विक स्तर पर जहां सभी सूचीबद्ध रियल एस्टेट परिसंपत्तियों में 57 प्रतिशत रिट्स और इनविट्स का हिस्सा हैं, वहीं भारत में यह महज 12 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि दोनों तंत्र देश में नये हैं और इन्हें बढ़ावा देने के उपाय किये जाने चाहिये। सेबी ने पेंशन फंड नियामक और बीमा नियामकों से उनके द्वारा नियमित इकाइयों को इनविट्स और रिट्स में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। साथ ही कहा कि म्यूचुअल फंडों में अतिरिक्त तरलता पूल तैयार किया जायेगा ताकि इन दोनों तंत्रों में निवेश कर देश में बुनियादी ढांचे के लिए ज्यादा से ज्यादा पूंजी उपलब्ध करायी जा सके।

उन्होंने खुदरा निवेशकों को इनविट्स और रिट्स में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि देश में सिर्फ 10 प्रतिशत निवेशक इनके बारे में जागरूक हैं। उन्होंने कहा कि खुदरा निवेशकों को अन्य विकल्पों की तरह इन्हें एक स्वाभाविक विकल्प के रूप में देखना चाहिये। उन्होंने कहा कि इनविट्स और रिट्स में निवेश की न्यूनतम सीमा कम की जानी चाहिये ताकि छोटे निवेशकों को भी महंगी परिसंपत्तियों में निवेश का मौका मिल सके।

संबोधन के बाद एक परिचर्चा के दौरान सेबी प्रमुख ने कहा कि देश में बॉन्ड बाजार विकसित हो रहा है। हालांकि उन्होंने इसके लिए तरलता सुनिश्चित करने की जरूरत बतायी ताकि निवेशक जब चाहें, बॉन्ड को बेचकर रिटर्न प्राप्त कर सकें और इसके लिए उन्हें बॉन्ड की मियाद पूरी होने का इंतजार न करना पड़े।

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