रांची , दिसंबर 06 -- झारखंड की राजधानी रांची स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स की आवासीय कॉलोनियों में वर्षों से झोपड़ियों और अस्थायी मड़ई में रह रहे परिवारों के घरों पर आज प्रशासन ने बुलडोजर चलाया।
बरियातू थाना के पीछे डॉक्टरों के क्वार्टर इलाके में इस अतिक्रमण हटाओ अभियान में बड़ी संख्या में पुलिस बल, नगर निगम की टीम, रिम्स प्रबंधन और जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट शामिल थे। अभियान के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध जताया, जबकि कई बेघर हुए परिवारों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में भेदभाव हुआ है। कई मार्मिक दृश्य भी सामने आए, जिनमें एक सास-बहू तीन नवजात शिशुओं के साथ खुले आसमान के नीचे अपने टूटे घरों को देखकर प्रशासन पर सवाल उठाती दिखीं।
पुलिस उपाधीक्षक मनोज कुमार ने आज बताया कि यह कार्रवाई झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में की जा रही है। उन्होंने कहा कि "मानवीय संवेदना अपनी जगह है, परंतु कानून का पालन हर हाल में कराया जाएगा।" उन्होंने यह भी बताया कि जिन लोगों के आशियाने हटाए गए, उनमें से कई रिम्स में आउटसोर्स पर कार्यरत हैं। वहीं, अविनाश कुमार नामक व्यक्ति ने सवाल उठाया कि जब परिसर में कई होमगार्ड जवान भी रह रहे हैं, तो केवल आउटसोर्स कर्मियों की झोपड़ियां ही क्यों हटाई गईं?झारखंड हाई कोर्ट ने केस संख्या डबल्यू.पी. (पीआईएल) 4736/2018 (ज्योति शर्मा बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) की सुनवाई में रिम्स प्रबंधन और राज्य सरकार को 72 घंटे के भीतर परिसर से सभी अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद आज संयुक्त अभियान चलाया गया।
अभियान के लिए नियुक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट साइनी तिग्गा ने बताया कि तीन टीमों ने रिम्स परिसर के अलग-अलग हिस्सों में कार्रवाई की। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग अभी भी रिम्स की जमीन पर अवैध कब्जा किए हुए हैं, वे स्वयं अतिक्रमण हटाएँ, अन्यथा झारखंड पब्लिक लैंड एनक्रोचमेंट एक्ट, 1958 सहित संबंधित प्रावधानों के तहत बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हटाए जाने में आने वाला खर्च भी अतिक्रमणकारियों से भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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