नयी दिल्ली , फरवरी 13 -- रिजर्व बैंक ने रिट्स (रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट) और इनविट्स (इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट) को बैंकों द्वारा ऋण देने के लिए नियमों में संशोधन के पांच प्रारूप शुक्रवार को जारी किये।

इनमें कहा गया है कि बैंक सेबी के पास पंजीकृत और उसके द्वारा नियमित तीन साल से परिचालन कर रहे रिट्स को ऋण दे सकेंगे। पिछले दो वित्त वर्ष में उसका वितरण योग्य शुद्ध नकद प्रवाह सकारात्मक होना चाहिये। इन संशोधनों को एक जुलाई 2026 से लागू करने का प्रावधान किया गया है।

विदेशों में स्थित रिट्स को भी विदेशी शाखाओं के जरिये ऋण दिया जा सकता है बशर्ते उस देश में शोधन अक्षमता और दिवाला प्रक्रिया का प्रावधान हो।

बैंक इस पर निगरानी रखेंगे कि ऋण की राशि का इस्तेमाल उसी काम के लिए हो रहा है जिसके लिए ऋण लिया जा रहा है। जमीन अधिग्रहण के लिए ऋण का उपयोग नहीं किया जा सकेगा, भले ही यह अधिग्रहण परियोजना का हिस्सा हो।

प्रारूप संशोधनों में कहा गया है कि बैंक रिट्स को ऋण देने के लिए नीति बनायेंगे जिसे उनका निदेशक मंडल मंजूर करेगा। ऋण की पूरी राशि के बदले बैंक के पास चिह्नित परिसंपत्ति को रखना होगा।

बैंकों को कुल ऋण में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए ऋण की सीमा तय करनी होगी। किसी भी सूरत में रिट्स को दिया गया ऋण बैंक के पात्र पूंजी आधार के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

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