मुंबई , फरवरी 06 -- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को समाप्त मौद्रिक समीक्षा में रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने केंद्रीय बैंक की मौद्रिकी नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद जारी एक बयान में कहा कि भू-राजनैतिक तनाव ऊंचा बना हुआ है और वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ रहा है। इस बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों से इसे और गति मिलने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि एपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया। अन्य नीतिगत दरों को भी यथावत रखा गया है। समिति ने भविष्य के लिए रुख पहले की तरह तटस्थ बनाये रखा है।

समिति ने चालू वित्त की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में खुदरा महंगाई 3.2 प्रतिशत पर और पूरे वित्त वर्ष के दौरान 2.1 प्रतिशत पर रहने का अनुमान व्यक्त किया है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई का अनुपात बढ़ाकर चार प्रतिशत और दूसरी तिमाही के लिए 4.2 प्रतिशत किया गया है। श्री मल्होत्रा ने बताया कि इसकी मुख्य वजह सोने-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है।

केंद्रीय बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। उसने कहा है कि अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर क्रमशः 6.9 प्रतिशत और सात प्रतिशत कर दिया है।

रिजर्व बैंक ने पिछले साल चार बार में रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी। दिसंबर 2025 की पिछली बैठक में उसने रेपो दर 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया था।

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