नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- प्रवर्तन निदेशालय (ई डी ) ने रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पूर्व प्रमोटर और निलंबित प्रबंध निदेशक संदीप गुप्ता को गिरफ्तार किया है। ई डी गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

संदीप गुप्ता को गुरुग्राम में एक विशेष धन शोधन रोकथाम अधिनियम न्यायालय (पीएमएलए कोर्ट) में पेश किया गया, जिसने उसे आठ दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया।

ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की आईपीसी और पीसी एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पीएमएलए जांच शुरू की। इसमें आरोपी व्यक्तियों पर आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार का आरोप है, जिससे उन्होंने खुद को फायदा पहुंचाया और 2015 से 2018 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 236 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचाया।

जांच में पता चला कि रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने किसी भी सामग्री की आपूर्ति नहीं थी लेकिन व्यवस्थित ढंग से फर्जी बिक्री रिकॉर्ड की थी, जिसमें 7.42 करोड़ रुपये कीमत के सूती कपड़े की बिक्री और 8.50 करोड़ रुपये की सौर-संबंधित सामान से जुड़ी फर्जी बिक्री कई शेल कंपनियों को की गई थी। इनका संचालन अलग-अलग लोग करते थे और इन लेन-देन के चालान तथा खाता-प्रविष्टियां जाली एवं हेरफेर वाली पायी गयीं ।इन हरकतों से कारोबार को जानबूझकर बढ़ाकर दिखाया गया और कंपनी की आर्थिक स्थिति को गलत तरीके से दिखाया गया ताकि कर्ज देने वालों और दूसरे हितधारकों को गुमराह किया जा सके। आगे की जांच में पता चला कि रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने एक गैर-परिचालन वाली कंपनी से 9.23 करोड़ रुपये के जेडआईडी संयंत्र और मशीनों की फर्जी खरीदारी खातों में दिखायी थी, जिसका बिजनेस प्रोफाइल, जीएसटी विवरण और एचएसएन कोड ऐसी मशीनरी सप्लाई से बिल्कुल मेल नहीं खाते थे।

रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जांच से पता चला कि संबंधित पार्टी से लेन-देन के माध्यम से बड़े पैमाने पर धन को इधर से उधर किया गया। वित्तीय वर्ष 2015-16 और वित्तीय वर्ष 2017-18 के बीच, लोन चुकाने के बहाने समूह की कंपनियों को लगभग 16.40 करोड़ रुपये हस्तांतरित किये गये थे। वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान, रिचा इंडस्ट्रीज के धन का इस्तेमाल रिचा कृष्णा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड में नियंत्रण हित हासिल करने के लिए किया गया, जिससे सीआईआरपी के दौरान रोहतक की एक मूल्यवान परियोजना डायवर्ट हो गयी। इसी अवधि में, रिचा इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के शेयर बहुत कम कीमत पर हस्तांतरित किये गये, जिससे आरआईएल को आर्थिक क्षति पहुंची।

जांच में पता चला कि सीआईआरपी शुरू होने से ठीक पहले संदीप गुप्ता ने निगमित देनदार की कीमती संपत्तियों को दूसरी जगह भेजने में अहम भूमिका निभाई थी। उसने कई शेल कंपनियां भी बनायी थीं और उनका इस्तेमाल अलग-अलग समय पर निगमित देनदार की संपत्तियों को दूसरी जगह भेजने के लिए किया गया था।

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