पथानामथिट्टा , मार्च 30 -- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) पर अपना हमला तेज करते हुए वायरल नारा "स्वर्णम कट्टवन आरप्पा?" (सोना किसने चुराया?) का इस्तेमाल किया जिससे सबरीमाला स्वर्ण विवाद केरल के चुनाव अभियान का एक केंद्रीय मुद्दा बन गया।

पथानामथिट्टा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए श्री गांधी ने सबरीमाला मंदिर में चल रहे कार्यों के दौरान सोने के कथित गायब होने और उसमें पाई गई अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि केरल के लोगों को इस मामले में पूरी पारदर्शिता एवं जवाबदेही का अधिकार है क्योंकि यह मामला सीधे आस्था एवं जनविश्वास से जुड़ा है।

पूरे राज्य में गूंजने वाले व्यापक रूप से लोकप्रिय विरोध गीत का उपयोग करते हुए श्री गांधी ने एलडीएफ सरकार की तीखी आलोचना की और उस पर जिम्मेदारी से बचने और इस मुद्दे पर सच्चाई सामने न लाने का आरोप लगाया।

एक बयान में श्री गांधी ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के माध्यम से खुद को लगातार राजनीतिक निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मेरे खिलाफ 36 मामले दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियों ने मुझसे 55 घंटे तक पूछताछ की है लेकिन मैं डरता नहीं हूं। इन मामलों का इस्तेमाल मुझे चुप कराने के लिए किया जा रहा है, लेकिन मैं सच बोलता रहूंगा।" उन्होंने अपने खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाइयों को विपक्षी आवाजों को दबाने के व्यापक प्रयास करार दिया।

केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन पर सीधा निशाना साधते हुए श्री गांधी और कांग्रेस नेताओं ने जांच एजेंसियों के पक्षपातपूर्ण कामकाज का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कई आरोप और मामले सामने आए हैं लेकिन प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो या अन्य जांच निकायों ने उनसे पूछताछ नहीं की है।उन्होंने इसे दोहरे मापदंड का स्पष्ट मामला बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं का आक्रामक रूप से पीछा किया जाता है जबकि सत्ता में बैठे लोगों को जांच से बचाया जाता है।

कांग्रेस नेता ने इस बात पर बल दिया कि यह मुद्दा राजनीति से परे हैक्योंकि इसमें श्रद्धालुओं की आस्था, संस्थागत अखंडता और सार्वजनिक जवाबदेही शामिल है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस मामले में एक गहन एवं विश्वसनीय जांच की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केरल में अपने हालिया चुनाव अभियान के दौरान सबरीमाला सोने की तस्करी के मामले को जानबूझकर नजरअंदाज किया और श्री मोदी पर राजनीतिक लाभ के लिए चुनिंदा मुद्दों को उठाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने केरल दौरे के दौरान विभिन्न विषयों पर विस्तार से बात की लेकिन राज्य में राजनीतिक बहस छेड़ देने वाले विवादास्पद सबरीमाला स्वर्ण मामले पर वह सुविधाजनक रूप से चुप रहे। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यह चूक आकस्मिक नहीं बल्कि कुछ हितों को साधने के लिए किया गया एक सुनियोजित कदम था। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा नेतृत्व, जो अक्सर खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ योद्धा के रूप में पेश करता है, ने केरल की जनता के सामने इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया।

श्री गांधी ने भाजपा पर चयनात्मक रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया और कहा कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है या नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि केरल के लोग राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और ऐसी चालों को भांप लेंगे। उन्होंने इस मामले को केंद्र में सत्ताधारी दल द्वारा संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी साधने के व्यापक पैटर्न से जोड़ा जबकि अन्य अवसरों पर विरोधियों को आक्रामक रूप से निशाना बनाया जाता है।

कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी केरल में गहन चुनावी अभियान के बीच आई है जहां तीनों प्रमुख मोर्चे कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ, माकपा के नेतृत्व वाला एलडीएफ और भाजपा विधानसभा चुनावों से पहले एक जोरदार आरोप-प्रत्यारोप में लगे हुए हैं।

सबरीमाला में निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सोने से संबंधित कथित अनियमितताओं ने केरल में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के नेतृत्व में विपक्ष ने एलडीएफ सरकार पर पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के बजाय मामले को दबाने का आरोप लगाया है। यह मामला फिलहाल अदालत की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के जांच के अंतर्गत है जिससे विवाद और भी गंभीर हो गया है।

विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही, "सोना किसने चुराया?" अभियान एक मुख्य राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरा है और उनकी टिप्पणियों से यूडीएफ और एलडीएफ के बीच की लड़ाई और तेज होने की उम्मीद है, जिससे सबरीमाला सोने का विवाद केरल के उच्च-स्तरीय चुनावी माहौल के केंद्र में बना रहेगा।

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