पतनमथिट्टा (केरल) , मार्च 30 -- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (वाममोर्चा) और भाजपा दोनों पर तीखा हमला बोला।

श्री गांधी ने नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले केरल में अपने सघन एक दिवसीय अभियान के तहत अडूर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दोनों दलों के बीच 'गुपचुप समझौते' का आरोप लगाया।

सभा को संबोधित करते हुए श्री गांधी ने दावा किया कि सच में भाजपा केरल में जीतने की कोशिश नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यहां भाजपा के पक्ष में पड़ने वाले वोटों का सीधा फायदा सत्ताधारी वाममोर्चे को मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों मोर्चे मिलकर काम कर रहे हैं और वामपंथी सरकार को सत्ता में बनाये रखने के लिए परोक्ष रूप से एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। उन्होंने मतदाताओं से इस राजनीतिक साठगांठ को पहचानने का आग्रह किया।

केंद्र पर कड़ा प्रहार करते हुए श्री गांधी ने भाजपा नीत सरकार पर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ 30 से अधिक मामले दर्ज किये गये हैं, जिन्हें उन्होंने अपनी आवाज दबाने की राजनीतिक रूप से प्रेरित कोशिश बताया। उन्होंने कहा, "मेरे खिलाफ 30 से अधिक मामले दर्ज किये गये हैं। जांच एजेंसियों ने घंटों मुझसे पूछताछ की है, लेकिन मैं डरता नहीं हूं। इन मामलों का इस्तेमाल मुझे चुप कराने के लिए किया जा रहा है, लेकिन मैं सच बोलना जारी रखूंगा।"केरल के राजनीतिक घटनाक्रम के साथ अपनी स्थिति की तुलना करते हुए श्री गांधी ने सवाल उठाया कि केंद्रीय एजेंसियों ने वाममोर्चा के नेताओं के खिलाफ ऐसी ही कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि यह चुनिंदा रवैया भाजपा और सत्ताधारी वाम मोर्चे के बीच 'गुप्त समझौते' का संकेत देता है। उन्होंने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर भी सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि वाममोर्चे की सरकार भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी और केंद्रीकृत शासन का प्रतीक बन गयी है। उन्होंने दावा किया कि श्री विजयन की प्रशासनिक शैली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नक्शेकदम पर चलते हुए सत्तावादी पैटर्न को दर्शाती है।

संवेदनशील सबरीमला मुद्दे पर श्री गांधी ने भाजपा और वाममोर्चा दोनों पर आरोप लगाया कि उन्होंने श्रद्धालुओं की चिंताओं को दूर करने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए इस मामले का इस्तेमाल किया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने सच्चाई को छिपाने की कोशिश की और पारदर्शिता से काम करने में विफल रही, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए श्री गांधी ने कहा कि केंद्र ने वास्तव में सबरीमला मुद्दे की अनदेखी की है और इस पर चिंता जताने का दिखावा करने के बावजूद वह कोई स्पष्ट या निर्णायक रुख अपनाने में विफल रहा है।

जनता की मुख्य चिंताओं पर बात करते हुए कांग्रेस नेता ने बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और आम लोगों के बीच छाई आर्थिक बदहाली की ओर इशारा किया और राज्य सरकार पर इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया।

उन्होंने वाममोर्चा प्रशासन के खिलाफ भ्रष्टाचार, जवाबदेही की कमी और शासन की विफलताओं के आरोपों को भी दोहराया।

राजनीतिक बदलाव का आह्वान करते हुए श्री गांधी ने मतदाताओं से वाममोर्चा और भाजपा दोनों को नकारने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ही जन कल्याण के लिए प्रतिबद्ध एक विश्वसनीय वैकल्पिक सरकार दे सकता है। यूडीएफ की संभावनाओं पर विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में बदलाव की लहर चल रही है।

इससे पहले दिन में श्री गांधी ने केरल में एक व्यस्त एक दिवसीय चुनावी दौरा किया। वह सुबह दिल्ली से विशेष उड़ान से 11 बजे तिरुवनंतपुरम पहुंचे। इसके बाद वह हेलीकॉप्टर से अडूर के लिए रवाना हुए और 11:45 बजे वहां पहुंचे। उन्होंने दोपहर 12 बजे से 12:45 बजे तक अडूर के केएसआरटीसी जंक्शन पर एक सभा को संबोधित किया, जिसके बाद दोपहर 1:30 बजे से 2:15 बजे के बीच पत्तनमथिट्टा के पुराने निजी बस स्टैंड पर एक जनसभा की।

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