बस्ती , मार्च 29 -- ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने रविवार को कहा कि राष्ट्रधर्म ही सत्य सनातन धर्म है और सदाचार के आधार पर ही राष्ट्र की उन्नति संभव है। राजकीय इंटर कॉलेज में आयोजित "सनातन धर्म संवाद" कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवान के नाम का स्मरण ही जीवन के उद्धार का मार्ग है। धर्म के साथ-साथ अधर्म की पहचान भी आवश्यक है, क्योंकि कई बार अधर्म धर्म का रूप धारण कर सामने आता है।

उन्होंने कहा कि जहां सदाचार होता है, वहीं सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना से ही राष्ट्र मजबूत बन सकता है। शंकराचार्य ने गोसेवा पर भी जोर देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में गौमाता का विशेष महत्व है और सभी को इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने लोगों से विदेशी परंपराओं को त्यागकर भारतीय संस्कृति और मूल्यों को अपनाने की अपील की।

इस अवसर पर उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश में ऐसी विचारधारा की आवश्यकता है जो भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के अनुरूप हो। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

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