नयी दिल्ली, जनवरी 13 -- राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित केशव कुंज मुख्यालय पर मंगलवार को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की। यह बैठक एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद आयोजित की गई, जिससे इसे राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि यह मुलाकात पूरी तरह शिष्टाचार भेंट थी और इसके लिए अनुरोध स्वयं चीनी पक्ष की ओर से किया गया था। संघ ने इसे औपचारिक सद्भावना के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैठक का कोई पूर्व निर्धारित एजेंडा नहीं था और यह संवाद सामान्य परिचय और आपसी विचार-विनिमय तक सीमित रहा। संघ प्रमुख मोहन भागवत इस बैठक में उपस्थित नहीं थे, क्योंकि वे उस समय यात्रा पर थे।
यह मुलाकात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि बीते कुछ वर्षों में आरएसएस और चीनी प्रतिनिधियों के बीच संवाद बहुत सीमित रहा है। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2025 में मोहन भागवत की व्याख्यान शृंखला के दौरान संघ ने चीनी राजनयिकों को आमंत्रित नहीं किया था। उस समय यह निर्णय ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में लिया गया था, जिसके बाद पाकिस्तान और चीन-दोनों देशों को कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया था, जबकि अन्य कई देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे थे।
इससे एक दिन पहले, सोमवार को सीपीसी का प्रतिनिधिमंडल भाजपा मुख्यालय भी पहुंचा था। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीपीसी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उपमंत्री सुन हैयान ने किया। भाजपा की ओर से बैठक की अगुवाई पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने की। बैठक में भाजपा और सीपीसी के बीच अंतर-दलीय संवाद को मजबूत करने, आपसी संपर्क बढ़ाने और संवाद के नए रास्ते तलाशने पर चर्चा हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग भी शामिल थे।
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