भोपाल , अक्टूबर 29 -- राष्ट्रीय साइबर जागरूकता माह के समापन अवसर पर मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आज राजधानी भोपाल में "साइबर जागरूकता रन-2025" का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्लेटिनम प्लाज़ा, अटल पथ से इस दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रन एपेक्स बैंक तिराहा से होते हुए टी.टी. नगर स्टेडियम पर संपन्न हुई।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, विधायक भगवानदास सबनानी, विशेष पुलिस महानिदेशक आदर्श कटियार और पंकज श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राकेश गुप्ता, ए. साईं मनोहर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, खेल जगत और मीडिया से जुड़े प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने "सुरक्षित रहें - सतर्क रहें - साइबर अपराध से बचें" का संदेश देते हुए डिजिटल सुरक्षा का संकल्प लिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत आज डिजिटल प्रगति के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने तकनीक को जीवन का हिस्सा बनाया है। कोविड काल में डिजिटल भुगतान व्यवस्था और वैक्सीनेशन अभियान ने भारत की तकनीकी क्षमता को विश्व पटल पर स्थापित किया। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ नई चुनौतियाँ भी आती हैं, और साइबर अपराध आज समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या ओटीपी साझा न करें और डिजिटल सतर्कता को अपनी आदत बनाएं। उन्होंने कहा कि "पहले लोग भीड़ में अपनी जेब संभालते थे, अब मोबाइल और डिजिटल जानकारी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।" डॉ. यादव ने कहा कि "राष्ट्रीय साइबर जागरूकता माह" केवल एक महीने का अभियान नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे निरंतर जन-जागरूकता के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि "रन फॉर साइबर अवेयरनेस" केवल दौड़ नहीं, बल्कि सोच और जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज का युग डिजिटल युग है, जहाँ बैंकिंग, शिक्षा, खरीदारी और शासन की अधिकांश गतिविधियाँ ऑनलाइन हो चुकी हैं। सुविधा के साथ जोखिम भी बढ़ा है, और साइबर अपराध सबसे तेज़ी से बढ़ता अपराध बन चुका है।
डीजीपी मकवाणा ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस के पास प्रतिदिन ऐसे कई मामले आते हैं जहाँ नागरिक एक गलत क्लिक से अपनी मेहनत की कमाई गँवा बैठते हैं। यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि विश्वास और पहचान की भी क्षति है। उन्होंने कहा कि पासवर्ड, ओटीपी या निजी जानकारी किसी के साथ साझा करना खतरे को निमंत्रण देने जैसा है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में लगातार साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। फरवरी 2025 में चलाए गए "सेफ क्लिक साइबर अभियान" के अच्छे परिणाम मिले हैं और अब तक लगभग डेढ़ करोड़ नागरिकों एवं छात्रों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा चुका है।
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