मिर्जापुर , दिसंबर 26 -- मिर्जापुर में प्रसिद्ध विंध्याचल धाम के तलहटी मे बसे इस्माइल चिश्ती का दरगाह कंतित उर्स मेला शुरू हो गया है। यह उर्स मेला एक राष्ट्रीय सद्भावना का एक मिसाल भी है जो एक हिन्दू परिवार द्वारा चादर चढ़ायें जाने के बाद ही शुरू होता है। यह परम्परा सदियों से चल रही है। ख्वाजा इस्माइल चिश्ती की दरगाह पर इस समय अनूठा दृश्य है। पूरा मेला जायरीनों से पटा पड़ा है। बिहार, झारखंड एवं मध्य प्रदेश आदि दूर दूर स्थानों से भारी संख्या में लोग आ रहे हैं। भीड़ के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

हिन्दूओं के पवित्र शक्तिपीठ विंध्याचल के तलहटी में स्थित कंतित शरीफ ख्वाजा इस्माइल चिश्ती की दरगाह है। वे अजमेर शरीफ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सगे भांजे है। कंतित शरीफ के संबंध में मान्यता है कि जो जायरीन अजमेर शरीफ की यात्रा नही कर पाते हैं।वे लोग यहां मत्था टेक एवं चादर चढ़ा कर अजमेर शरीफ के गरीब नवाज की कृपा प्राप्त कर लेते हैं। वैसे भी अजमेर शरीफ यात्रा शुरु करने से पहले या यात्रा पूर्ण करने के बाद भी जायरीन आते रहते हैं।

कंतित शरीफ के इस्माइल चिश्ती के संबंध में यहां कई किंवदंतियां प्रचलित है। स्थानीय लोग इस्माइल चिश्ती के हैरतंगेज कारनामो को बड़े गर्व से बताते हैं। मोइनुद्दीन चिश्ती के भांजे इस्माइल चिश्ती के कंतित आगमन को लेकर कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है मगर जनश्रुतियों एवं राजपूत गहरवारो के ऐतिहासिकता को सर्वाधिक मान्यता दी जाती है।

मान्यता के अनुसार अवध राज्य के इस सूबे कंतित में कभी गहरवार राजपूत राजाओं का शासन था। इसी वंश वृक्ष में दानव राय नमक एक राजपूत शासन ने अपनी दानी प्रवृत्तियों से जनता में आतंक पैदा कर दिया था। इसी समय बाबा इस्माइल चिश्ती ने दाना राय के आतंक को अपने कारनामों से समाप्त कराया। तभी से जनता में उनके प्रति आदर एवं सम्मान का भाव पैदा हुआ । उन्हें देव दूत माना जाने लगा।

गंगा के किनारे अवस्थित इस गांव में राजपूत राजाओं के किला एवं बावली के भग्नावशेष विशेष इन जनश्रुतियों को पुष्ट करते हैं।

पर्वतमाला की गोद में बस यह स्थल अपने चमत्कारों के साथ प्राकृतिक वैभव से परिपूर्ण है ।संभवत इसी कारण लोक प्रसिद्ध भी है ।इस दरगाह के पश्चिम में हिंदुओं का प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी धाम अवस्थित है।उत्तर में मां जाह्नवी की धारा है। दक्षिण में विंध्य पर्वत माला की हरितिमा इसकी शोभा में चार-चांद लगा देते हैं।

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