नयी दिल्ली , अक्टूबर 30 -- राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सार्वजनिक वित्त पोषित टोल प्लाजा में टोल संग्रह की लागत में कई उपायों के जरिए भारी कमी की है जिसके कारण वित्त वर्ष 2024-25 में प्लाजा पर टोल संग्रह पर 2,062 करोड़ रुपए बचाए गये हैं।

आधिकारिक सूचना के अनुसार प्राधिकरण ने टोल प्लाजा वित्त पोषण में भारी कटौती करते हुए 2023-24 की टोल संग्रहण लागत 4736 करोड़ रुपए को 2024-25 में घटाकर कर 2674 करोड़ रुपए किया है जिसके कारण प्राधिकरण को 2062 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है।

प्राधिकरण ने इस सूचना में कहा है कि टोल प्लाजा पर वित्त पोषण का उसका खर्च पहले वित्त वर्ष की तुलना में 2,062 करोड़ रुपए यानी 17.27 प्रतिशत कम हुआ है जबकि 2024-25 में यह 9.27 प्रतिशत रह गया। 'टोल संग्रहण की लागत' टोलिंग एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए टोल शुल्क और सार्वजनिक वित्त पोषित टोल प्लाजा पर एनएचएआई को भेजी गई राशि के बीच का अंतर है।

हालाँकि, वित्त वर्ष 2024-25 में टोल एजेंसियों ने शुल्क 28,823 करोड़ रुपये अर्जित किया जिसमें से प्राधिकरण को 26,149 करोड़ रुपये भेजे गए।

उनका कहना था कि टोल संग्रह की लागत में बचत मुख्य रूप से प्राधिकरण द्वारा की गई विभिन्न पहलों के कारण हुई है। इनमें मौजूदा अनुबंधों की कड़ी निगरानी, तीन महीने के मानित विस्तार के प्रावधान को हटाना, समय पर बोली लगाना, एक साल की अवधि के लिए अधिकतम अनुबंध प्रदान सुनिश्चित करना और तीन महीने के अल्पकालिक अनुबंधों को कम करना जैसे उपाय है।

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