चेन्नई , अप्रैल 18 -- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेठ ने डॉक्टरों से तकनीक के मुकाबले सहानुभूति को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है।यहां शुक्रवार को श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (एसआरआईएचईआर) के 41वें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मरीज डर, अनिश्चितता और लाचारी के भाव के साथ डॉक्टरों के पास आते हैं।

यह देखते हुए कि उन्हें तसल्ली के साथ सुनना सबसे उन्नत चिकित्सा उपचार से भी अधिक प्रभावशाली हो सकता है, उन्होंने उल्लेख किया कि जहां तकनीक स्वास्थ्य सेवा को बदलना जारी रखेगी, वहीं सहानुभूति हमेशा एक अच्छी चिकित्सा पद्धति के केंद्र में बनी रहेगी।

डॉ. अभिजात ने स्नातकों से अपने नैदानिक कौशल को लगातार निखारने और शोध एवं नवाचार में सक्रिय रूप से शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा,"देश को ऐसे डॉक्टरों की आवश्यकता है जो न केवल सक्षम हों, बल्कि संवेदनशील और सामाजिक रूप से जिम्मेदार भी हों।"उन्होंने उन्हें चिकित्सा पेशे के नैतिक मूल्यों का दृढ़ता से पालन करने की भी सलाह दी और कहा कि हर डॉक्टर के पीछे एक समाज खड़ा होता है, जिसने उन पर विश्वास किया और उनका समर्थन किया है।

उन्होंने मेधावी छात्रों को 53 स्वर्ण पदक भी प्रदान किए। एसआरआईएचईआर की विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. जानवी श्रीधर ने एमबीबीएस परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तीन स्वर्ण पदक हासिल किए।

एसआरआईएचईआर के प्रो-चांसलर आर. वी. सेंगोटुवन ने चिकित्सा, इंजीनियरिंग और प्रबंधन विषयों के पीएचडी, स्नातकोत्तर और स्नातक छात्रों सहित 902 पास-आउट छात्रों को डिग्रियां प्रदान कीं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित