मथुरा 21मार्च (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कान्हानगरी मथुरा के तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन शनिवार को गोवर्धन पहुंच कर विश्व प्रसिद्ध श्री दानघाटी मंदिर में दर्शन किए और सप्तकोसीय 21 किलोमीटर की परिक्रमा लगाई।

इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं। खास बात यह रही कि राष्ट्रपति ने न केवल विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, बल्कि स्थानीय बच्चों के साथ संवाद कर उन्हें चॉकलेट भी बांटी।

राष्ट्रपति मुर्मु का काफिला जैसे ही गोवर्धन पहुंचा, वहां उत्सव जैसा माहौल हो गया। दानघाटी मंदिर में कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी और प्रभारी मंत्री संदीप सिंह ने उनकी अगवानी की। मंदिर के सेवायत सीताराम शर्मा ने राष्ट्रपति को चुनरी भेंट की, जिसके बाद उन्होंने गर्भगृह में ठाकुर श्री गिरिराज महाराज का दूध से अभिषेक किया। राष्ट्रपति ने मंदिर की परिक्रमा कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

दानघाटी मंदिर से शुरू हुई यह परिक्रमा श्रद्धा के कई रंगों से भरी रही। राष्ट्रपति और राज्यपाल ने 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा का कुछ हिस्सा पैदल और कुछ गोल्फ कार्ट के जरिए तय किया। परिक्रमा मार्ग का एक हिस्सा राजस्थान में पड़ता है, जहां राजस्थान सरकार के प्रतिनिधियों ने महामहिम का जोरदार स्वागत किया। आन्यौर गांव में जब राष्ट्रपति पैदल चल रही थीं, तो उन्होंने वहां मौजूद छोटे बच्चों को पास बुलाकर चॉकलेट बांटी। राष्ट्रपति के हाथों से उपहार पाकर बच्चे निहाल हो गए।

परिक्रमा के दौरान जगह-जगह स्कूली छात्रों ने तिरंगा लहराकर महामहिम का अभिनंदन किया। रमण रेती आश्रम में महंत हरिओम बाबा की मौजूदगी में बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद किया। मार्ग में विभिन्न टोलियों द्वारा ढोल-नगाड़ों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसे देखकर राष्ट्रपति बेहद प्रभावित हुईं और कलाकारों के साथ फोटो भी खिंचवाई।

संयोग से आज 'विश्व वानिकी दिवस' भी था। इस अवसर को यादगार बनाते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने परिक्रमा मार्ग पर स्थित गोरवा वन ब्लॉक में बरगद का पौधा रोपा। भारतीय वन सेवा के अधिकारियों ने इस पहल के लिए राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया और उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया।

बड़ी परिक्रमा के बाद राष्ट्रपति ने छोटी परिक्रमा मार्ग पर स्थित मानसी गंगा के दर्शन किए। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजन कर आरती उतारी और पुष्प अर्पित किए। इसके बाद मुकुट मुखारबिंद मंदिर में श्रीजी पीठाचार्य मनीष बाबा ने उन्हें गिरिराज बाबा का अभिषेक संपन्न कराया।

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