नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- राज्य सभा में मंगलवार को विपक्ष ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में दर्शायी गयी सरकार की उपलब्धियों को जमीनी हकीकत से दूर बताया और कहा कि सरकार इस तरह के 'प्रचार को ही उपलब्धि मानती 'है।
बजट सत्र के प्रारंभ में संसद के दोनों सदनों की समवेत बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव चर्चा के दूसरे दिन कांग्रेस पार्टी की रजनी अशोकराव पाटिल ने कहा, ' राष्ट्रपति के अभिभाषण से जमीनी सच्चाई और आम जनता की पीड़ा का अंदाजा नहीं लगता।' उन्होंने कहा कि इसमें उच्च वृद्धि की बात तो की गयी है पर यह नहीं बताया गया है कि इसका लाभ मिल किसे रहा है। कृषि उत्पादन में वृद्धि के आंकड़े दिये गये हैं पर किसानों की आय बढ़ नहीं रही है। निर्यात में गिरावट का असर आय, कारोबार और रोजगार पर दिख रहा है। अमेरिका में भारतीय माल पर ऊंचे आयात शुल्क से कपड़ा , चमड़ा , समुद्री उत्पाद जैसे श्रम गहन क्षेत्रों पर बुरा असर पड़ा है।
श्रीमती पाटिल ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की घोषणा का उल्लेख करते हुए आशंका जतायी कि इससे भारत का कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा । उन्होंने इसकी जानकरी पहले अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने पर आपत्ति जताई। उन्होंने इस समझौते पर सदन में प्रधानमंत्री की ओर से वक्तव्य दिये जाने की मांग भी की ।
श्रीमती पाटिल ने कहा, हमारा विरोध उस सोच का विरोध है जो प्रचार को ही उपलब्धि मानती है। .. विकास केवल जुबानी जमाखर्च से ही नहीं होगा।
दूसरे दिन की चर्चा शुरू करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ सदस्य घनश्याम तिवाड़ी ने अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों की उपेक्षा किये जाने की विपक्ष की आलोचना को खारिज किया। उन्होंने कहा, ' हमें (भाजपा) राष्ट्रपति बनवाने के तीन अवसर मिले और हमने कलाम साहब ( मुस्लिम), रामनाथ कोविंदजी ( अनुसूचित जाति) और अब द्रौपदी मुर्मु (आदिवासी) को बनवाया।' राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा पर सदन में कतिपय विपक्षी सदस्यों के हमलों के जवाब में श्री तिवाड़ी ने कहा कि वह स्वयं पुराने स्वयं सेवक है । संघ के कार्यक्रमों के समवेत गान में मातृभूमि के प्रति समर्पण , मातृभूमि को वैभवपूर्ण बनाने की प्रार्थना की जाती है।
उन्होंने संघवाद को लेकर सरकार की आलोचना करने वाले द्रमुक के सदस्यों का जवाब देते हुए कहा कि भारत का संघवाद अमेरिकी संघवाद नहीं है। हमारी संघीय व्यवस्था एकीकृत संघवाद की है। यहां केंद्र के पास राज्यों की सीमाओं के बदलने और नये राज्यों के गठन का अधिकार है।
तृणमूल कांग्रेस के रीताब्रत बनर्जी ने बांग्ला में अपना वक्तव्य रखते हुए सरकार की सोच और कामों की आलोचना करते हुए भारतीय प्रेस परिषद के पुनर्गठन में विलम्ब का मुद्दा भी उठाया।
धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए वाईएसआर कांग्रेस के गोला बाबूराव ने मोदी सरकार की उपलब्धियों की सराहना करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था को चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था तक पहुंचाने ओर 25 करोड़ लोगों को गरीबी के गर्त से निकालने में सफलता का विशेष रूप से उल्लेख किया।
इसके साथ ही उन्होंने आंध्र प्रदेश में रेल सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिये जाने की शिकायत की। उन्होंने आंध प्रदेश में गोदावरी नदी पर बनने वाले पोलावरम बांध की ऊंचाई को कथित रूप से 45 मीटर से घटाकर 41 मीटर किये जाने की योजना की आलोचना की और कहा कि ऊंचाई घटने से राज्य के कई क्षेत्रों को बाढ़ से क्षति होगी।
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