नयी दिल्ली , जनवरी 28 -- केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को यहां केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की प्रमुख राष्ट्रीय जनसंपर्क एवं जन-जागरूकता पहल "वंदे मातरम् तटीय साइक्लोथॉन-2026" का मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम से वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया और साइक्लोथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इसके साथ ही 25 दिनों के इस विशाल राष्ट्रीय अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई। सीआईएसएफ की दो साइक्लिंग टीमें एक साथ बक्कखाली (पश्चिम बंगाल) एवं लखपत (गुजरात) से रवाना हुईं। ये टीमें देश के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों के लगभग 6,500 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 9 तटीय राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरेंगी और 22 फरवरी को कोच्चि में इसका समापन होगा।
शुभारंभ समारोह में डॉ. पल्लवी जैन गोविल, सचिव, युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय, शत्रुजीत कपूर, महानिदेशक, आईटीबीपी, प्रवीर रंजन, महानिदेशक, सीआईएसएफ , राकेश अग्रवाल, महानिदेशक, एनआईए, श्री गौरव द्विवेदी, सीईओ, प्रसार भारती तथा संजय सिंघल, महानिदेशक, एसएसबी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
सभी अतिथियों ने इंडिया गेट के निकट आयोजित संक्षिप्त साइकिल रैली में भी भाग लिया और साइक्लोथॉन को प्रतीकात्मक समर्थन प्रदान किया। उनकी उपस्थिति ने मंत्रालयों एवं विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच सशक्त सहयोग को दर्शाते हुए इस पहल के राष्ट्रीय महत्व, एकजुटता, सतर्कता और साझे संकल्प का स्पष्ट संदेश दिया।
तटीय साइक्लोथॉन के दूसरे संस्करण के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री राय ने कहा कि यह आयोजन 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। वंदे मातरम् वह अमर गीत है जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरणा दी और आज भी पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा की भावना से मार्गदर्शन प्रदान करता है। श्री राय ने गृह मंत्रालय का तटीय सुरक्षा सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर है। उन्होंने कहा कि नागरिकों, विशेषकर तटीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ही तटीय सुरक्षा सुदृढ़ बनाई जा सकती है।
इस अवसर पर सीआईएसएफ महानिदेशक ने कहा कि वंदे मातरम् तटीय साइक्लोथॉन-2026, वंदे मातरम् के 150 वर्ष के ऐतिहासिक स्मरणोत्सव का एक महत्वपूर्ण अंग है। वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकता, बलिदान और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। यह पहल उसी भावना को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवहारिक रूप में साकार करने का प्रयास है, ताकि नागरिकों को देश की महत्वपूर्ण समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में सहभागी बनाया जा सके।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित