रायपुर, फरवरी 11 -- देश के दस प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं 100 से अधिक जन संगठनों के आह्वान पर केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ कल (12 फरवरी) को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को लेकर छत्तीसगढ़ में श्रमिक संगठनों ने सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में आज कर्मचारी भवन बुढ़ापारा से एक भव्य मशाल रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रमिकों, कर्मचारियों एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

रैली के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा थोपी जा रही चार श्रम संहिताएं पूरी तरह कॉरपोरेट हितों को संरक्षण देने वाली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों के मूल अधिकारों-जैसे संगठन बनाने का अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी और नियमित आठ घंटे के कार्यदिवस-को व्यवस्थित रूप से समाप्त किया जा रहा है। महापात्र ने प्रदेश के समस्त श्रमिकों से अपील की कि वे 12 फरवरी की हड़ताल को ऐतिहासिक बनाने के लिए एकजुट होकर भाग लें।

श्रम एवं संनिर्माण कर्मकार मंडल के पूर्व अध्यक्ष सन्नी अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा श्रम कानून लंबे संघर्षों की देन थे और अपनी सीमाओं के बावजूद श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं वेतन से जुड़े अधिकार प्रदान करते थे। नई श्रम संहिताएं इन सभी सुरक्षा उपायों को नियोक्ताओं के पक्ष में समाप्त करने वाली हैं।

आल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन के नेता शिरीष नलगुंडवार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों के निजीकरण एवं विनिवेश की नीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बीमा कानून (संशोधन) विधेयक 2025 के पारित होने के बाद बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 100 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे एलआईसी में अतिरिक्त विनिवेश और पीएसजीआई कंपनियों के निजीकरण की मांग तेज हो गई है। उन्होंने आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एफडीआई सीमा बढ़ाने की कवायद को राष्ट्रहित के विरुद्ध बताया।

सारथी.अभयवार्तासभा को वी.एस. बघेल, सुरेन्द्र शर्मा, राजेश पराते, अतुल देशमुख, गजेन्द्र पटेल, के.के. साहू, दिनेश पटेल, सतीश मेश्राम, ए.एस. नसकर, विजय पोर्ते, महेंद्र लदेर, अजय टांडी एवं रामदेव जंघेल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और बीमा संस्थान राष्ट्रनिर्माण, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा की रीढ़ हैं। इन्हें निजी हितों को सौंपना देश की आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय हित से खिलवाड़ होगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित