रायगढ़/रायपुर , जनवरी 19 -- छत्तीसगढ़ में धान खरीदी एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गई है। किसानों की परेशानियों, रकबा समर्पण, टोकन और धान की कमी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।

धान खरीदी में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए खरसिया विधायक उमेश पटेल सोमवार को किसानों के साथ रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। विधायक ने आरोप लगाया कि जिले में धान खरीदी के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है और किसानों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।

मीडिया से चर्चा में उमेश पटेल ने कहा कि पहले कवर्धा में लगभग सात करोड़ रुपये के धान को चूहों द्वारा खा जाने का मामला सामने आया था और अब रायगढ़ जिले में करीब नौ करोड़ रुपये के धान को भी "चूहों" के नाम पर कम दिखाया जा रहा है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहा कि जिले में विवादित जमीनों को भी जबरन छीना जा रहा है।

विधायक ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह किसानों से धान खरीदी से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रही है। रकबा समर्पण और टोकन को लेकर उन्होंने कहा कि किसानों से जबरदस्ती रकबा समर्पण कराया जा रहा है और पात्र किसानों को टोकन नहीं दिए जा रहे हैं। कई समितियों में धान खरीदी बंद करने का हवाला देकर किसानों को परेशान किया जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में किसान अब भी धान लेकर बैठे हैं।

विधायक ने प्रशासन को शाम तक व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस किसानों के साथ ट्रैक्टरों में कलेक्टरेट परिसर के सामने धरना देगी।

कांग्रेस विधायक पटेल ने कहा कि "पहले तो कवर्धा में सात करोड़ का धान चूहा खा गया और अभी पता चला है कि नौ करोड़ का धान रायगढ़ में चूहा खा गया। मैं तो उन चूहों को ढूंढ रहा हूं, कहां मिलेंगे, आपको मिले तो आप फोटो खींचकर दीजिए। ये शुद्ध रूप से भ्रष्टाचार है। रायगढ़ में इस तरह का भ्रष्टाचार हो रहा है कि किसी की भी विवादित जमीन को छीन लिया जा रहा है। चूहे के नाम पर धान को कम कर दिया जा रहा है। भाजपा के लोग पूरी तरह से अपनी ताकत लगा रहे हैं कि किस तरह से लोगों को परेशान किया जाए। सरकार धान की खरीदी किसानों से न करके भ्रष्टाचार के माध्यम से पैसा कमाना चाह रही है। जबरदस्ती रकबा समर्पण कराया जा रहा है, टोकन नहीं दिया जा रहा है। हमारी एक ही मांग है कि जिसने मेहनत से जेन्युइन तरीके से धान उगाया है, उसका धान सरकार खरीदे। अगर शाम तक व्यवस्था नहीं बनी तो बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर कलेक्टरेट के सामने बैठेंगे। सरकार किसान विरोधी है।"इस मामले पर प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखा है। अपर कलेक्टर ने कहा कि विधायक द्वारा उठाई गई मांगों पर गंभीरता से काम किया जा रहा है और किसानों को राहत दी जाएगी।

जिले के अपर कलेक्टर अपूर्व प्रियेश टोप्पो ने कहा कि, "आज खरसिया विधायक उमेश पटेल किसानों की समस्या को लेकर जिला प्रशासन के पास आए थे। उनकी मुख्य मांग यह थी कि कुछ समितियों में लिमिट कम कर दी गई है, कुछ जगह किसानों का टोकन जारी नहीं हो रहा है और कुछ जगह जबरदस्ती रकबा समर्पण करवाया जा रहा है। जिन समितियों में लिमिट कम की गई है, वहां आंकलन कर लिमिट बढ़ाई जाएगी। कोई भी पात्र किसान जिनके पास खुद का धान है उनसे किसी भी प्रकार का समर्पण नहीं कराया जा रहा है। जिन किसानों का अब तक समिति में सत्यापन नहीं हो पाया है, उनका मजिस्ट्रेट और पटवारी द्वारा तत्काल सत्यापन कर टोकन जारी किया जाएगा।"धान खरीदी को लेकर विवाद की शुरुआत कवर्धा जिले से हुई थी। जिले के धान संग्रहण केंद्रों-खासकर बाजार चारभाठा और बघर्रा-में करीब 26 हजार क्विंटल धान की कमी सामने आई, जिसकी कीमत लगभग सात करोड़ रुपये बताई गई। अधिकारियों ने इस नुकसान के लिए चूहे, दीमक, कीड़े और मौसम की खराबी को जिम्मेदार ठहराया।

हालांकि विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने इसे धान की चोरी और गबन का मामला बताते हुए प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े किए। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी ने चूहों को ढूंढने का अभियान चलाया और सीबीआ जांच की मांग की। इस मामले में कलेक्टर ने जिम्मेदार जिला विपणन अधिकारी को नोटिस जारी किया और संग्रहण केंद्र प्रभारी को निलंबित भी किया गया। प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए टीम गठित की गई है।

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