पटना , अक्टूबर 26 -- बिहार में प्रथम चारण में छह नवंबर को 121 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव में पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिवंगत राम विलास पासवान की परंपरागत खगड़िया जिले की अलौली (सुरक्षित) सीट पर राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस के पुत्र यशराज पासवान की अग्निपरीक्षा होगी।
खगड़िया जिले में चार विधानसभा सीट अलौली (सुरक्षित), खगड़िया, बेलदौर और परबत्ता है। अलौली (सुरक्षित) पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद), खगड़िया में कांग्रेस, परबत्ता और बेलदौर पर जनता दल यूनाईटेड (जदयू) का कब्जा है।
अलौली (सुरक्षित) सीट से पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री पारस के पुत्र यशराज पासवान अपनी सियासी पारी की शुरूआत कर रहे हैं। यशराज पासवान रालोजपा के टिकट पर चुनावी अखाड़े में उतरे हैं, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने यहां विधायक रामवृक्ष सदा पर फिर से भरोसा जताते हुये चुनावी दंगल में उतारा है। जदयू ने यहां पूर्व विधायक रामचंद्र सदा पर दांव लगाया है। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। अलौली (सुरक्षित) पर रामविलास पासवान के परिवार का दबदबा रहा है। दिवंगत रामविलास पासवान के राजनीतिक सफर की शुरुआत अलौली विधानसभा सीट से हुई थी, जो आज भी पासवान परिवार के प्रभाव का प्रतीक बनी हुई है। इस सीट से वर्ष 1969 में पहली बार रामविलास पासवान निर्वाचित हुये थे। वहीं श्री पारस इस सीट से पहली बार वर्ष 1977 में निर्वाचित हुये।इसके बाद वर्ष 1985, 1990, 1995, 2000, फरवरी और अक्टूबर 2005 में इस सीट से श्री पारस ने चुनाव जीता। वर्ष 2010 में हुये चुनाव में खुद को उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बताने वाले श्री पारस को हार का सामना करना पड़ा था। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) उम्मीदवार श्री पारस, जदयू के रामचंद्र सदा से 17523 मतों केअंतर से चुनाव हार गये थे। वर्ष 2015 के चुनाव में लोजपा उम्मीदवार श्री पारस को राजद के चंदन कुमार ने पराजित कर दिया था।वर्ष 2020 के चुनाव में राजद के रामवृक्ष सदा ने जदयू की साधना देवी को पराजित किया था। लोजपा उम्मीदवार रामचंद्र सदा तीसरे नंबर पर रहे थे।
इस बार, अलौली सीट पासवान परिवार की विरासत की जंग का गवाह बन रही है। अलौली विधानसभा भी बेहद खास है, क्योंकि इसे पासवान परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है।अलौली सीट पर श्री पारस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुयी है, वहीं उनके पुत्र यशराज पासवान पर परिवार की परंपरागत सीट पर फिर से कब्जा जमाने के साथ ही खुद को साबित करने की चुनौती है। अलौली सीट पर इस चुनाव में पांच प्रत्याशी चुनावी अखाड़े में डटे हैं।देखना दिलचस्प होगा कि अलौली सीट पर कौन पारस बनता है।
खगड़िया सीट पर कांग्रेस ने विधायक छत्रपति यादव को बेटिकट कर दिया है और नये खिलाड़ी चंदन यादव पर दांव लगाया है। वहीं जदयू ने जिलाध्यक्ष बबलू मंडल को उम्मीदवार बनाया है। वर्ष 2020 के चुनाव में कांग्रेस के छत्रपति यादव ने जदयू की तत्कालीन विधायक पूनम देवी यादव को पराजित कर उनका विजयी रथ रोक दिया था। जदयू से बागी (लोजपा) प्रत्याशी और पूर्व सांसद रेणु कुमारी तीसरे नंबर पर रही थी।पूर्व विधायक बाहुबली रणवीर यादव की पत्नी पूनम देवी यादव 2005 फरवरी, 2005 अक्टूबर, 2010 और 2015 में निर्वाचित हुयी थी। वह इस बार चुनाव नहीं लड़ रही हैं।खगड़िया सीट पर वर्ष 1990 में रणवीर यादव भी निर्दलीय विधायक बने थे।खगड़िया सीट पर कुल 10 प्रत्याशी चुनावी दंगल में हुंकार भर रहे हैं।
बेलदौर विधानसभा सीट पर जदयू ने विधायक पन्ना सिंह पटेल सियासी पिच पर जीत का चौका लगाने के उद्देश्य से चुनावी मैदान में डटे हैं, वहीं चुनौती देने के लिये कांग्रेस ने मिथिलेश कुमार निषाद को उम्मीदवार बनाया है। वर्ष 2020 में जदयू के श्री पटेल ने कांग्रेस के चंदन कुमार को पराजित किया था। लोजपा के मिथिलेश कुमार निषाद तीसरे नंबर पर रहे थे। पूर्व सासंद राम शरण यादव के पौत्र और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी सुशांत यादव छठे नंबर पर रहे थे। इस बार के चुनाव में जदयू के श्री पटेल और कांग्रेस के श्री निषाद फिर आमने सामने हैं। बेलदौर में 14 प्रत्याशी चुनावी दंगल में उतरे हैं।
परबत्ता सीट से चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर बाबू लाल शौर्य समर में उतरे हैं। वहीं राजद ने यहां विधायक डा.संजीव कुमार को चुनावी दंगल में उतारा है।वर्ष 2020 में इस सीट पर जदयू ने तत्कालीन विधायक रामानंद प्रसाद सिंह की जगह उनके पुत्र संजीव कुमार को चुनावी दंगल में उतारा था। जदयू उम्मीदवार संजीव कुमार ने राजद के दिगंबर प्रसाद तिवारी को पराजित किया था और पहली बार विधायक बने। इस बार चुनाव की घोषणा से पूर्व डा. संजीव कुमार राजद में शामिल हो गये थे। डा. संजीव कुमार के पिता रामानंद प्रसाद सिंह ने यहां पांच बार जीत दर्ज की है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह ने वर्ष 1967 में जीत हासिल की थी। बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस सीट पर दो बार वर्ष 2000 और 2010 में जीत दर्ज की है।इस बार चुनाव में यहां पांच प्रत्याशी किस्मत आजमां रहे हैं।
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