नयी दिल्ली , मार्च 27 -- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन नेयह शुक्रवार को कहा कि रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार न केवल पेशेवर उपलब्धियों का सम्मान करते हैं, बल्कि निडर और सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता की भावना को भी जीवित रखते हैं।

श्री राधाकृष्णन ने यहां द इंडियन एक्सप्रेस समूह की ओर से आयोजित पुरस्कार समारोह के 20वें संस्करण को संबोधित करते हुए उन्होंने रामनाथ गोयनका के योगदान को याद किया। उन्होंने इमरजेंसी में 'खामोशी की ताकत' का उदाहरण देते हुए कहा कि इमरजेंसी के दौरान रामनाथ गोयनका ने खाली संपादकीय प्रकाशित कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अनोखा और शक्तिशाली संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रेस की आजादी और नागरिकों के अधिकारों का प्रतीक बन गया। उन्होंने बताया कि उस समय संपादकों की गिरफ्तारी, बिजली कटौती, आर्थिक नुकसान और प्रशासनिक दबाव जैसी कठिनाइयों के बावजूद गोयनका अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे।

श्री राधाकृष्णन ने जोर देते हुए कहा कि चर्चा, बहस और असहमति अंततः राष्ट्रहित में निर्णय तक पहुंचनी चाहिए, न कि व्यवधान का कारण बननी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति' के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे वैश्विक और राष्ट्रीय घटनाओं को भारतीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करें।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया को विकास, नवाचार और जमीनी बदलावों की कहानियों को भी प्रमुखता देनी चाहिए, ताकि समाज के सामने संतुलित तस्वीर पेश हो सके।

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