रामनगर , जनवरी 12 -- उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में सोमवार को कोसी नदी में उपखनिज भरान कार्य को लेकर बड़ा विवाद सामने आया,बाहर से आई सैकड़ों मजदूरों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि कोसी नदी में अवैध रूप से बैककैरा और अन्य भारी मशीनें चलाई जा रही हैं, जिसके कारण वे बेरोज़गार हो गए हैं और उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई हा।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने कहा कि वे हर वर्ष बड़ी संख्या में कोसी नदी में मैन्युअल तरीके से उपखनिज निकालकर वाहनों में भरने का कार्य करते हैं,इसी काम से उनके परिवारों का पालन-पोषण होता है। मजदूरों का कहना है कि इस बार नदी में मशीनों के जरिए उपखनिज भरा जा रहा है, जिससे उनका पारंपरिक रोजगार पूरी तरह छिन गया है।
मजदूरों ने बताया कि उन्होंने काम की उम्मीद में हजारों रुपये खर्च कर परात, बेलचे और अन्य औजार खरीदे थे, लेकिन नदी में मशीनों के चलते उन्हें काम नहीं मिल रहा है। मजदूरों का कहना है कि अब वे अपने घर लौटने को मजबूर हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मजदूरों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आरटीआई कार्यकर्ता देव बिष्ट ने बताया कि हर साल कोसी नदी में करीब 50 हजार से लेकर एक लाख तक मजदूर उपखनिज भरान कार्य के लिए आते हैं। लेकिन इस बार मशीनों के इस्तेमाल से ये सभी मजदूर बेरोज़गार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है,इसी को लेकर आज रामनगर उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मांग की गई है कि कोसी नदी में मशीनों के संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए,वहीं इस मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि जब से उत्तराखंड की नदियों का खनन एक हैदराबाद की कंपनी को दिया गया है, तब से लगातार नदियों में बैककैरा और अन्य भारी मशीनें चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने के वादे किए थे लेकिन हकीकत यह है कि मजदूर नदी तक पहुंचने के बाद भी बिना काम लौटने को मजबूर हैं।
रणजीत रावत ने आरोप लगाया कि नदी में मशीनों से खनन करना नियमों के खिलाफ है। कानून के अनुसार आपदा की स्थिति को छोड़कर नदी में किसी भी तरह की मशीनों से खुदाई नहीं की जा सकती और खनन कार्य केवल मैन्युअल तरीके से सीमित गहराई तक किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कोसी नदी में कई जगह 90-90 मीटर गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं, जो भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं।
इस पूरे मामले पर रामनगर के उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि कोसी नदी में बैककैरा चलने से जुड़े वीडियो उनके संज्ञान में आए हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वन विकास निगम के संबंधित अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है और कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। उपजिलाधिकारी ने कहा कि अवैध खनन को लेकर औचक छापेमारी की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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