रामनगर , दिसंबर 09 -- उत्तराखंड में रामनगर के ग्राम पूछड़ी क्षेत्र में वनभूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद तनाव बढ़ता जा रहा है। रविवार को पुलिस, प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने क्षेत्र में अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया था। इसके बाद से प्रभावित परिवार और कई सामाजिक संगठन लगातार विरोध जता रहे हैं।

इसी मुद्दे पर मंगलवार को ग्राम पूछड़ी के एकता चौक में एक बैठक बुलाई गई थी, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और लोगों को वहां से हटाकर सभा को रोक दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने ग्रामीणों को डराया-धमकाया और कहा कि अनुमति के बिना कोई बैठक नहीं होगी।

बैठक रोके जाने के बाद माहौल में अफरा-तफरी पैदा हो गई। इसके बाद आयोजकों ने बैठक स्थल बदलकर रामनगर के नागा बाबा मंदिर रोड स्थित व्यापार मंडल कार्यालय में सभा की। यहां मौजूद वक्ताओं ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि अतिक्रमण हटाने के तीन दिन बाद भी प्रभावित परिवारों के लिए न तो रहने की कोई व्यवस्था की गई है, न भोजन की। पीड़ित महिला सीमा तिवारी ने कहा कि हम अपने छोटे बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे कड़कड़ाती ठंड में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने पहले घर तोड़े और अब कोई मदद भी नहीं दे रहा।

बैठक में ललित उप्रेती ने दावा किया कि आज पुलिस ने साफ शब्दों में कहा कि अगर सभा की गई तो जेल भेज दिया जाएगा। गांव में पुलिस ऐसा माहौल बना रही है कि लोग डरकर अपनी बात तक नहीं कह पा रहे।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने गांव में बिजली और पानी के कनेक्शन भी काट दिए हैं, जिससे प्रभावित परिवार एक-एक बूंद पानी के लिए परेशान हैं। उनका कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह गरीब परिवारों के उत्पीड़न जैसी है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द पुनर्वास की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो यह विरोध एक बड़े जन आंदोलन में बदलेगा। साथ ही, उन्होंने मामले को न्यायालय तक ले जाने की भी बात कही है।

फिलहाल क्षेत्र में पुलिस बल तैनात है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित