रामनगर , दिसंबर 08 -- उत्तराखंड के रामनगर के ग्राम पूछड़ी में वन विभाग की जमीन से हटाए गए अतिक्रमण के खिलाफ सोमवार को पीड़ित परिवारों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले तहसील परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की कार्रवाई को पूरी तरह गलत बताते हुए प्रदेश सरकार, वन विभाग और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
उल्लेखनीय है कि रविवार को पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि पर बने अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया था। इस कार्रवाई में कई परिवार बेघर हो गए, जिससे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया।
आज धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की है और वन कानूनों का भी पूरी तरह उल्लंघन किया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अतिक्रमण हटाने से पहले प्रशासन को पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन बिना किसी वैकल्पिक इंतजाम के ही लोगों को बेघर कर दिया गया।
संयुक्त संघर्ष समिति ने तराई पश्चिमी वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) के कार्यों और संपत्तियों की जांच कराने की मांग की और उन्हें पद से हटाने की मांग उठाई। वहीं स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट की चुप्पी को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि इस पूरे मामले में पीड़ितों के साथ खड़े नहीं दिखे। पीड़ित परिवारों ने अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस पर महिलाओं के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार के भी गंभीर आरोप लगाए। महिलाओं का कहना है कि कार्रवाई के वक्त उनके साथ अभद्रता की गई और उन्हें जबरन हटाया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बुलडोजर की कार्रवाई नहीं रोकी, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। साथ ही उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव में ऐसे नेताओं का बहिष्कार करने की भी घोषणा की।
वहीं दूसरी ओर, रामनगर के उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा कि संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा कुमाऊं आयुक्त के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई के दौरान किसी भी स्टे प्राप्त भवन को नहीं छुआ गया है। यदि किसी के पास भूमि से संबंधित कोई स्टे है, तो वह डीएफओ को दिखा सकता है।
उपजिलाधिकारी ने पुलिस पर लगाए गए आरोपों पर कहा कि कार्रवाई की पूरी वीडियोग्राफी मौजूद है और यदि जांच की मांग की जाती है, तो निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यह ज्ञापन कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को भेजा जा रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित