रामगढ़ , जनवरी 22 -- झारखंड के रामगढ़ जिले में 12 जनवरी की रात दयाल स्टील फैक्ट्री में हुई बड़ी लूट की घटना का पुलिस ने सफल उद्भेदन कर लिया है।
पुलिस ने इस मामले में आज सात अपराधियों को गिरफ्तार करते हुए लूटे गए कॉपर वायर, नकद रुपये, हथियार और वाहन बरामद किए हैं।
ज्ञात हो कि 12 जनवरी 2026 को मध्य रात्रि लगभग 01:30 बजे रामगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत चाहा स्थित दयाल स्टील फैक्ट्री में 10-12 अज्ञात अपराधकर्मियों ने चाहरदीवारी तोड़कर धावा बोला था। अपराधियों ने फैक्ट्री में तैनात सुरक्षा प्रहरी एवं कर्मियों को पिस्टल दिखाकर बंधक बना लिया और करीब 2000 से 2200 किलोग्राम तांबे का तार व अन्य सामान चार पहिया वाहन में लोड कर फरार हो गए थे। इस संबंध में रामगढ़ थाना कांड संख्या-11/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अजय कुमार के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी परमेश्वर प्रसाद के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी अनुसंधान के आधार पर अपराधियों की पहचान करते हुए लगातार छापामारी शुरू की।
इसी क्रम में 22 जनवरी को गुप्त सूचना मिली कि लूट में शामिल अपराधी एनएच-23 स्थित छतरमाण्डु क्षेत्र से कुज्जू की ओर किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। सूचना के आधार पर चेकिंग अभियान चलाया गया। चेकिंग के दौरान बिना नंबर प्लेट की बोलेरो पिकअप को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक भागने लगा। पीछा कर वाहन को रोका गया, जिसमें सवार छह अपराधियों को मौके पर गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम अख्तर अली, सन्नी कुमार, रणधीर कुमार, नागेश्वर बेलदार उर्फ हनी, पंकज कुमार और गौरी कुमार बताए गए हैं। तलाशी के दौरान गौरी कुमार के पास से एक देशी कट्टा, दो जिंदा गोली और 1,03,000 रुपये नकद बरामद हुए। पूछताछ में आरोपियों ने रुपये दयाल स्टील फैक्ट्री से लूटे गए सामान को बेचने से प्राप्त होने की बात स्वीकार की।
अभियुक्तों की निशानदेही पर हजारीबाग जिले के ईचाक थाना क्षेत्र के करियातपुर गांव से मुकेश कसेरा को गिरफ्तार करते हुए लगभग 250 किलोग्राम चोरी का कॉपर वायर व अन्य सामान बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब तीन लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस के अनुसार सभी अभियुक्तों का पूर्व आपराधिक इतिहास रहा है, जिसकी जांच की जा रही है। पूरे अभियान में रामगढ़ थाना, रजरप्पा थाना और तकनीकी शाखा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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