कोटा , अक्टूबर 28 -- राजस्थान में कोटा के रामगंज मंडी में मंगलवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की अश्वारूढ़ विशाल प्रतिमा का अनावरण हुआ।
इस अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के अलावा महाराणा प्रताप के वंशज एवं पूर्व राज परिवार के सदस्य विश्वराज सिंह मेवाड़ भी मौजूद रहे।
प्रतिमा अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आत्मसम्मान किसी भी सत्ता या वैभव से बड़ा होता है। हल्दीघाटी के रण में भले ही सेनाएँ असमान थीं, परंतु प्रताप के हृदय में जो ज्वाला प्रज्वलित थी, उसने मुग़ल सल्तनत के अहंकार को झुका दिया। महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ के नहीं, पूरे भारतवर्ष के गौरव हैं। उनका जीवन एक ऐसा दीपस्तंभ है, जो हमें हमारे आत्मबल को नित नई ऊर्जा देता रहेगा।
उन्होंने कहा कि आज इस प्रतिमा के अनावरण से यह धरती पवित्र हुई है। महाराणा प्रताप का नाम लेते ही हर भारतवासी के हृदय में गर्व और श्रद्धा का भाव जाग उठता है। यह पुण्य बेला इतिहास और वर्तमान का अद्भुत संगम है। जब हम हाड़ौती की इस वीरभूमि पर महाराणा प्रताप जैसी अमर विभूति की अश्वारूढ़ प्रतिमा का अनावरण कर रहे हैं, तो यह केवल एक मूर्ति का उद्घाटन नहीं है, यह उस अजेय आत्मा के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है जिसने अपने स्वाभिमान और मातृभूमि के सम्मान के लिए जीवन का हर क्षण समर्पित कर दिया।
महाराणा प्रताप के जीवन से सीख लेने के लिए युवाओं को प्रेरित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन यह सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व केवल शक्ति से नहीं, बल्कि नीति, न्याय और करुणा से उपजता है। जब प्रताप ने युद्ध के बाद भी अपने प्रजाजनों की रक्षा को सर्वोच्च माना, तो उन्होंने यह उदाहरण दिया कि राजा का धर्म केवल शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण की रक्षा करना है। उनके शासन में किसी जाति, वर्ग या पंथ का भेदभाव नहीं था । सबके लिए समान न्याय और सम्मान का वातावरण था। यह दृष्टि आज के लोकतांत्रिक भारत की आत्मा से गहराई से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने विपरीत परिस्थितियों में भी स्वराज और स्वाभिमान की जो अलौकिक मिसाल कायम की, वह अब भी हमारे राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक है। जब उन्होंने वन-वन भटकते हुए अपने परिवार और प्रजा के साथ कठिन जीवन व्यतीत किया, तब उन्होंने हमें यह सिखाया कि त्याग और तप ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।
इस अवसर पर महाराणा प्रताप के वंशज, पूर्व मेवाड़ राज परिवार के सदस्य एवं विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष हमें यह स्मरण कराता है कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और गौरव की रक्षा केवल तलवारों से नहीं, बल्कि अटल संकल्प, नैतिक बल और आत्मनिर्भरता से होती है। असफलता और कठिनाई किसी राष्ट्र या व्यक्ति को नहीं रोक सकती, यदि संकल्प अटल हो।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि राणा की महानता का प्रमाण पत्र कोई भी इतिहासकार नहीं दे सकता। उन जैसा महान देशभक्त और योद्धा न था है और न होगा। उनकी महानता को चुनौती देने वाले पाठ्यक्रमों को हमारी सरकार हमेशा हमेशा के लिए किताबों से मिटा देगी। महाराणा प्रताप की महानता का पाठ अब राजस्थान का बच्चा बच्चा पढ़ेगा।
सांसद महिमा कुमारी ने वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की प्रतिमा के अनवारण के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि यह महज एक प्रतिमा नहीं भारत की आत्मा है। जिसके जरिए आने वाली पीढ़ियाँ देशभक्ति, पराक्रम और त्याग की उस परंपरा से जुड़ी रहेंगी जिसने भारत को विश्व में विशिष्ट बनाया है। इस अवसर पर कोटा के पूर्व राज परिवार सदस्य इज्यराज सिंह, विधायक कल्पना देवी ने भी संबोधित किया।
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