हनुमानगढ़ , दिसम्बर 17 -- राजस्थान सरकार के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील राठीखेड़ा गांव, चक-5 आरके में निर्माणाधीन एथनॉल संयंत्र को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि यह संयंत्र पिछले कुछ समय से विवादों में घिरा हुआ है, जहां भू-जल प्रदूषण, पर्यावरणीय क्षति और जल गुणवत्ता में गिरावट की आशंकाएं जतायी जा रही हैं। इस संयंत्र के खिलाफ आज हनुमानगढ़ जंक्शन की धान मंडी में विभिन्न किसान संगठनों, राठीखेड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों और अन्य हितधारकों द्वारा एक बड़ी महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। महापंचायत की वजह से क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
सूत्रों ने बताया कि महापंचायत के आयोजन को देखते हुए जांच समिति का गठन कल देर रात को किया गया। विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि समिति संयंत्र से संभावित भू-जल एवं पर्यावरण प्रदूषण की विस्तृत जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही शिकायतों का निपटारा करना है, जिसमें स्थानीय लोगों और किसानों की आशंकाओं को प्रमुखता दी जाएगी। विशेष रूप से समिति यह आकलन करेगी कि एथनॉल संयंत्र के संचालन से भू-जल स्तर में कोई गिरावट आएगी है या नहीं, जल गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ेगा और समग्र पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल असर तो नहीं होगा। इसके अलावा संयंत्र के लिए पर्यावरणीय मानकों, प्रदूषण नियंत्रण नियमों और स्वीकृत शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी भी गहन जांच की जाएगी।
सूत्रों ने बताया कि समिति में तकनीकी और प्रशासनिक विशेषज्ञ हैं। विश्राम मीणा, संभागीय आयुक्त (बीकानेर), को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष शासन सचिव को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में जिला कलेक्टर (हनुमानगढ़), प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता और भू-जल विभाग के मुख्य अभियंता शामिल हैं। यह समिति क्षेत्रीय स्तर पर मौके का दौरा करेगी और नमूना और डेटा संग्रह करेगी और स्थानीय निवासियों से सीधे जानकारी लेगी।
सूत्रों ने बताया कि आदेश में यह भी निर्देश दिया गया है कि गठित समिति अपनी जांच रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग सरकार को प्रस्तुत करेगी।
उधर किसान संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने मांग की है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी हो और इसमें स्थानीय प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
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