नयी दिल्ली , दिसम्बर 02 -- संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा में कहा है कि सरकार मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण-एसआईआर पर चर्चा करने को तैयार है लेकिन इससे पहले एकाध विधेयक को पारित कर वंदेमातरम को चर्चा के लिए लिया जाएगा तो इस पर विपक्षी सदस्यों ने तीखी आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि पहले एसआईआर पर चर्चा की मांग की जा रही है तो इसे ही पहले लिया जाना चाहिए।
सत्ता पक्ष तथा विपक्ष में इसको लेकर चल रही तीखी बहस के बीच सभापति सी पी राधाकृष्णन ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को 'मणिपुर माल एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक 2025' को चर्चा तथा पारित कराने के लिए सदन में रखने को कहा तो विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।
श्री रिजिजू ने सदन को बताया कि सरकार चुनाव सुधारों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। सदन में जिन विषयों पर चर्चा होनी है और सरकार ने इसको लेकर जो सूची दी है उसके हिसाब से तीन मुद्दों को प्रमुखता से रखा गया है। उनका कहना है कि देश में आजादी के दौरान वंदे मातरम सबके कंठ का हार बन गया। यह आजादी का प्रमुख नारा था और इसलिए इस गीत की रचना के 150वें साल पर देशभर में आयोजन किये जा रहे हैँ।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ने देश को आरंभ से ही प्रभावित किया है। विपक्षी दल चुनाव सुधारों पर चर्चा के लिए एकजुट है लेकिन पहले वंदेमातरम पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने सदस्यों से अन्य मुद्दों पर चर्चा में शामिल होने का आग्रह किया और कहा कि सरकार विपक्ष की मांग पर चर्चा करने को तैयार है।
तृणमूल कांग्रेस के देरेक ओब्राइन ने कहा कि पूरा विपक्ष एकजुट होकर एसआईआर पर चर्चा कराने की मांग कर रहा है। इस पर सभापति ने कहा कि मंत्री ने जो बात कही है वह आपने सुन ली।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि 267 के जो नोटिस दिये गये हैं उसके तहत वही मुद्दे लाए जाने चाहिए जिसकी बात कही है। सरकार को अन्य मुद्दों की बात करने की बजाय पहले इस मुद्दे पर चर्चा करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम कांग्रेस से आया है उनकी तरफ सेनहीं आया है। श्री राधाकृष्णने कहा कि वंदे मातरम सबसे आया है।
द्रमुक के तिरुची शिवा ने कहा कि पहले एसआईआर को चर्चा के लिए लाना चाहिए और उसके बाद ही वंदेमातरम पर चर्चा होनी चाहिए। इस पर सरकार को क्या दिक्क्त है। इसको लेकर लगातार विपक्ष मांग कर रहा है इसलिए एसआईआर पर पहले चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि यह समसायिक मुद्दा है इसलिए सरकार को एसआईआर की गंभीर मांग पर पहले विचार करना चाहिए।
माकपा के डॉ जॉन ब्रिटास ने कहा कि रविवार को सभी दलों के नेताओं ने एसआईआर चर्चा की बात की थी और सरकार को विपक्ष की इस मांग पर विचार कर पहले एसआईआर पर ही चर्चा करानी चाहिए।
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