देहरादून/रुद्रप्रयाग , नवम्बर 03 -- उत्तराखंड के छठे राज्य वित्त आयोग की टीम ने सोमवार को रूद्रप्रयाग जनपद मुख्यालय पर आयोजित बैठक में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ पंचायतों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण पर मंथन किया।
बैठक में आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्य सचिव एन. रविशंकर तथा सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस पीएस जंगपांगी और डॉ. एमसी जोशी ने उपस्थित जन प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने पंचायतों को प्राप्त होने वाले सहायता अनुदान, राजस्व वितरण, कर संग्रहण, एवं वित्तीय पारदर्शिता से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पंचायतें ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं, इसलिए उन्हें वित्तीय दृष्टि से सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।
पंचायत प्रतिनिधियों ने आयोग के समक्ष विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के संचालन के लिए समयबद्ध वित्तीय आवंटन, तकनीकी मार्गदर्शन और मानव संसाधन की उपलब्धता आवश्यक है। प्रतिनिधियों ने यह भी सुझाव दिया कि योजनाओं के स्वीकृति एवं भुगतान की प्रक्रिया को और सरल तथा ऑनलाइन किया जाए, ताकि विकास कार्यों में गति लाई जा सके।
आयोग के अध्यक्ष श्री रविशंकर ने कहा कि राज्य वित्त आयोग का उद्देश्य पंचायतों को वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना और स्थानीय निकायों की जरूरतों के अनुरूप नीतियां बनाना है। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझावों को आयोग की अनुशंसा रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा, जिससे राज्य स्तर पर बेहतर नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।
आयोग ने जिला प्रशासन की ओर से किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि रुद्रप्रयाग जनपद में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था जनहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आयोग के सुझावों के अनुरूप पंचायतें भविष्य में और अधिक प्रभावी ढंग से ग्रामीण विकास में योगदान देंगी।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, उपाध्यक्ष रितु नेगी, जिला पंचायत सदस्य और भाजपा जिला अध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत सहित जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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