पटना , अप्रैल 21 -- िहार में भू-जल के गिरते स्तर से निपटने के लिए लघु जल संसाधन विभाग ने पायलट आधार पर "इंजेक्शन वेल" परियोजना को लागू करने की योजना बना रही है। यह तकनीक गहरे एक्वीफर में सीधे जल पहुंचाने में सहायक होगी। जिससे दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। इसके साथ ही, जल के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए राज्य में भू-जल विनियमन का प्रारूप भी तैयार किया जा रहा है।
यह पहल जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे अनियंत्रण दोहन पर रोक लगाई जा सकेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
लघु जल संसाधन विभाग के अनुसार बिहार में जल संकट, विशेषकर भू-जल के गिरते स्तर से निपटने के लिए बिहार सरकार द्वारा राज्यभर में जल-जीवन-हरियाली अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भू-जल का पुनर्भरण (रिचार्ज) तथा जल का संरक्षण और संचयन है। केन्द्रीय भू-जल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में बिहार में अर्ध-गंभीर, गंभीर और अतिदोहन श्रेणी के कुल 102 प्रखंडों को चिन्हित किया था।
यह स्थिति राज्य के चिंताजनक थी, लेकिन जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या घटकर अब महज 64 रह गई है। यह उल्लेखनीय सुधार इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार के प्रयास सही दिशा में हैं और उनके सकारात्मक परिणाम भी अब सामने आने लगे हैं।
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