पटना , दिसंबर 17 -- प्रदेश में स्ट्रीट डॉग्स के बढ़ते आतंक से आम लोगों को राहत दिलाने के उद्देश्य से पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने बुधवार को प्रदेश के सभी जिला परिषदों को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर 'श्वान आश्रय गृह' (डॉग पाउंड्स) के निर्माण के लिये उपयुक्त जमीन चिन्हित कर अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपें।

इस संबंध में सचिव श्री कुमार ने सभी जिलों के उप- विकास आयुक्तों को भी पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा है। निर्णय के तहत प्रत्येक जिले में जिला परिषद की ओर से श्वान आश्रय गृह का निर्माण किया जायेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से पकड़े गये आवारा कुत्तों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जा सके।

सचिव श्री कुमार के अनुसार श्वान आश्रय गृह का निर्माण जिला पशुपालन पदाधिकारी द्वारा तैयार किये गये डिजाइन और प्राक्कलन के अनुसार किया जायेगा। इसके निर्माण पर होने वाला खर्च षष्ठम राज्य वित्त आयोग की सामान्य निधि से वहन किया जायेगा। आश्रय गृहों में रखे जाने वाले स्ट्रीट डॉग्स को रैबिज से बचाव का टीका लगाया जायेगा और उनकी डिवार्मिंग के लिये निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जायेगा। इस संबंध में वैक्सिनेशन और स्वास्थ्य देखभाल की जिम्मेदारी डेयरी एवं मत्स्य संसाधन विभाग की होगी। उन्होंने बताया कि स्ट्रीट डॉग्स से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये जिला परिषदों की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किये जायेंगे, जिनका व्यापक प्रचार- प्रसार किया जायेगा। आम लोग इन हेल्पलाइन नंबरों पर सूचना देकर आवारा कुत्तों की समस्या की शिकायत कर सकेंगे।

पंचायती राज सचिव ने कहा कि कुत्तों के आतंक की चुनौती से निपटने में जन जागरूकता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। लोगों से अपील की जायेगी कि विवाह समारोह, सार्वजनिक कार्यक्रमों या त्योहारों के बाद बचा हुआ भोजन खुले में न फेंकें, क्योंकि इससे आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती है। उन्होंने कहा कि भोजन का निबटारा वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से करने पर जोर दिया जाये।

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