नयी दिल्ली , मार्च 13 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मनरेगा के लंबित बिलों के निपटान को लेकर विपक्षी सदस्यों की आशंकाओं को खरिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि इस बार के अनुपूरक मांगों की दूसरी सूची में इसके लिए 30,000 करोड़ रुपये के प्रावधान किये गये हैं जिससे इस साल 31 मार्च तक के बकाये का भुगतान हो जाएगा।
श्रीमती सीतारमण ने लोक सभा में चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अनुदान की अनुपूरक मांगों की दूसरी सूची और उससे संबंधित विनियोग प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि कुछ सदस्यों ने मनरेगा के भुगतान को लेकर चिंता व्यक्त की है इसलिए उनको बताना आवश्यक है कि जीरामजी कानून अप्रैल से शुरु होगा। सरकार ने मरनेगा के लंबित मामलों के भुगतान के लिए इस सूची में व्यवस्था कर दी है।
उन्होंने विकसित भारत जी राम जी विधेयक के बाद राज्यों के लंबित बलों को लेकर विपक्षी सदस्यों की चिंता के जवाब में कहा, 'जब हम वीबी-जी राम-जी बिल लेकर आए थे, उस समय 95,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। यह बजट में शामिल है। वित्त विधेयक पारित होने के बाद, 1 अप्रैल से इसके तहत 95,000 करोड़ का प्रावधान लागू हो जाएगा।
उन्होंने कहा, ' लेकिन इसके अलावा कई राज्यों के पुराने बिल लंबित हैं। वे यही मुद्दा उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि नया प्रावधान लागू होने के बाद उनके पुराने बिलों का क्या होगा?"वित्त मंत्री ने कहा , ' उन पुराने लंबित बिलों के लिए अनुपूरक अनुदान मांग इन अनुपूरक मांगों की सूची में 30,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे 31 मार्च तक के मनरेगा के बकाया भुगतान का निपटारा हो जाएगा।",श्रीमती सीतारमण ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, " विपक्ष को इसकी बिल्कुल परवाह नहीं है। लेकिन जब वे फिर यहाँ खड़े होते हैं तो पूछते हैं, 'मनरेगा के लिए आपने क्या दिया। इस सरकार ने मनरेगा के फंड में कटौती कर दी है। जब मैं जवाब दे रही हूँ, जब मैं बजट में प्रावधान बता रही हूँ, तब वे सुनते ही नहीं। और इसके ऊपर वे बेशर्मी से यहाँ खड़े होकर मेरी आवाज़ दबाने की कोशिश करते हैं। मैं उनके इस व्यवहार की कड़ी निंदा करती हूँ।"वित्त मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए "पहली और दूसरी दोनों अनुपूरक अनुदानों की मांगों को मिलाकर कुल राशि 4.13 लाख करोड़ रुपये बनती है। हालांकि, इस राशि में से 1.71 लाख करोड़ तकनीकी रुप से अनुपूरक है। इस तरह की ग्रांट की तकनीकी मांग किसी अनुदान के एक भाग में हुई बचत को उसी अनुदान के दूसरे भाग में उपयोग करके या उस अनुदान के भीतर प्राप्त अतिरिक्त आय और वसूली से पूरा करने के लिए होती हैं। उनका कहना था कि विपक्ष की तरफ से सदन में अनुदान की इन अनुपूरक मांगों को ऐसे पेश करने की कोशिश की जा रही है मानो इनके माध्यम से बजट अनुमान में प्रस्तुत खर्च की राशि को बढ़ाया जा रहा है।
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